एटा में चोर बने कोतवाल
इन दिनों मामला बड़ा अजीब हो गया है। जिसे जो समझो, वो वह नहीं निकलता है । जिसे मॉडल समझो वो कॉल गर्ल निकलती है, जिसे धुरंधर टीम समझो वो फिसड्डी निकलती है, जिसे कहीं न गिनो वो ओलंपिक का राज्यवर्धन सिंह राठौर निकलता है और जिसे हिन्दुस्तानी पुलिस समझो वो चोर का बाप निकलती है।बहरहाल, इसी असमंजस के माहौल में उत्तर प्रदेश की एटा पुलिस ने एक अनोखी मिसाल कायम की है।उसने चोर और पुलिस का भेद खत्म कर दिया है। न....न.... न....आप गलत न समझें......एटा पुलिस ने खुद चोरी शुरु नहीं की है बल्कि उसने चोरों को शहर का कोतवाल बना दिया है। है न दिलचस्प कहानी। एटा में अब शहर के बदमाश पहरेदारी कर रहे हैं।पुलिस का मानना है कि जब चोर ही तिजोरी की रखवाली करेंगे तो उन्हें लूटेगा कौन।एटा पुलिस ने फिलहाल पहले चरण में शहर के 1600 नामजद मुजरिमों में से 300 मुजरिमों को ये जिम्मेदारी सौंपी है। पुलिस का कहना है कि अगर उन्हें सुधारने की ये कोशिश कामयाब रहती है तो धीरे-धीरे बाकी मुजरिमों को भी शहर का कोतवाल बना दिया जाएगा।भई मजा आ गया.....जब चोर बना कोतवाल तो अब डर काहे का....
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5 Comments:
तो पुलिस वाले क्या करेंगे?
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आलोक, at 6:23 PM
विचार कुछ बुरा नहीं है। :-)
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Anonymous, at 12:24 AM
priya mittro,
sabsa pahle to yeh sikhaao ki comment devnagri mein kaise dikhe?
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rachnaakaar, at 10:17 PM
priya mittro,
sabsa pahle to yeh sikhaao ki comment devnagri mein kaise dikhe?
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rachnaakaar, at 10:27 PM
बहुत ही अच्छा विचार है, मेरे खयाल से पिछले तीन महीने से यह सफलतापूर्वक चल रहा है. ऐसे प्रयोग होते रहने चाहियें. बजाय की एक इंसान किसी अपराध की वजह से जिन्दगी भर जेल में सड़ता रहे, अगर समाज की मुख्यधारा में उनके वापसी की कोई संभावना हो तो उसे जरुर खंगालना चाहिये.
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Vijay Thakur, at 1:07 AM
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