The Taj Mahal is a Temple Place
ताजमहल है एक शिव-मन्दिर
अभी हाल ही में सुन्नी वक्फ बोर्ड के नये दावे के बाद ताजमहल एक बार पुन: विवादों के घेरे में आ गया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड का दावा है कि ताजमहल पर उसका हक है क्योंकि शाहजहाँ ने अपनी वसीयत में ताज के रख-रखाव का जिम्मा उसे दिया था। वहीं दूसरी ओर दीदार-ए-अंजुमन नाम की एक दूसरी संस्था ने भी ताज पर अपना दावा ठोक दिया है। भला यह सब देखकर हिन्दूवादी कैसे चुप रहते, इसलिये उन्होने भी दावा किया है कि ताजमहल मूलत: एक मन्दिर है और इसे फिर से हिन्दुओं को सौंप देना चाहिये। संघर्ष दलों के गठन में महारथी श्री विनय कटियार ने बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी के बाद अब ताजमहल की मुक्ति के लिये भोलेनाथ सेना को गठित करने की घोषणा भी लगे हाथों कर दी है। श्री विनय कटियार के इस विश्वास का आधार विख्यात इतिहासकार श्री पी एन ओक द्वारा लिखित पुस्तक The Taj Mahal is a Temple Place है। इन सभी पक्षों को लट्ठम-लट्ठा होते देखकर मुझे भी इस पुस्तक को पढने की इच्छा हुई। श्री ओक द्वारा दिये गये तर्क काफी ठोस प्रतीत होते हैं, कुछ प्रमुख तर्क पढें और बताएं कि आपका इस बारे में क्या कहना है।
मन्दिर परम्परा
(1) ताजमहल संस्कृत शब्द तेजोमहालय यानि शिव मन्दिर का अपभ्रंश होने से पता चलता है कि अग्रेश्वर महादेव अर्थात अग्रनगर के नाथ ईश्वर शंकर जी को यहां स्थापित किया गया है।
(2) ताजमहल के शिखर पर लगा धातु चिह्न चांद-तारा नहीं अपितु स्पष्टत: त्रिशूल है, जिसपर नीचे की ओर स्वस्तिक का चिह्न अभी भी देखा जा सकता है। कश्मीर में अभी ऐसे कई मन्दिर हैं, जहां शिखर पर इसी प्रकार के स्वस्तिक चिह्न-अंकित त्रिशूल लगे हुए हैं।
(3) संगमरमरी तहखाने में संगमरमरी जाली के शिखर पर बने कलश कुल 108 हैं, जो संख्या पवित्र हिन्दू मन्दिरों की परम्परा है।
कार्बन-14 जाँच
(4) श्री ओक की इस पुस्तक को पढकर एक अमेरिकन प्राध्यापक Marvin Mills भारत आए थे। ताजमहल के पिछवाड़े में यमुना के किनारे पर ताजमहल का एक प्राचीन लकड़ी का टूटा हुआ द्वार है, उसका एक टुकड़ा वे ले गये। उस टुकड़े की उन्होनें New York में Carbon-14 जाँच कराई। उससे भी यही सिद्ध हुआ कि ताजमहल शाहजहाँ के काल से सैकड़ों वर्ष पूर्व बनी ईमारत है।
असंगत तथ्य
(5) केन्द्रीय अष्टकोने कक्ष में जहां मुमताज की नकली कब्र है (और जहां उससे पूर्व शिवलिंग होता था) उसके द्वार में प्रवेश करने से पूर्व पर्यटक दाएं-बाएं दीवारों पर अंकित संगमरमरी चित्रकला देखें। उसमें शंख के आकार के पत्ते वाले पौधे तथा ऊँ आकार के पुष्प दिखेंगे। कक्ष के अन्दर जालियों का अष्टकोना आलय बना है उन जालियों के ऊपरी किनारे में गुलाबी रंग के कमल जड़े हैं। यह सारे चिह्न हिन्दू हैं। विश्व के किसी भी इस्लामी मकबरे में इस प्रकार की कलाकृतियां नहीं हैं।
(6) कब्र के ऊपर गुम्बद के मध्य से अष्टधातु की एक ज़ंजीर लटक रही है। शिवलिंग पर जलसिंचन करने वाला सुवर्ण कलश इसी ज़ंजीर से टंगा था। उसे निकालकर जब शाहजहाँ के खज़ाने में जमा करा दिया गया तो वह ज़ंजीर भद्दी दीखने लगी। अत: लॉर्ड कर्ज़न ने उस ज़ंजीर से एक दीव लटकवा दिया। यह दीप अभी भी वहां लटका देखा जा सकता है।
(7) संगमरमरी चबूतरे के तहखाने में जहां मुमताज की कब्र बतायी जाती है, उतरते समय पांच-सात सीढियां उतरने के बाद एक आला सा बना हुआ है। उसके दाएं-बाएं की दीवारें देखें। वे बेजोड़ संगमरमरी शिलाओं से बन्द हैं। उससे पता चलता है कि तहखाने के जो अन्य सैकड़ों कक्ष बन्द हैं, उनमें पहुंचने के जीने यहां से निकलते थे। वे शाहजहाँ ने बन्द करा दिये।
(8) जब प्रेक्षक सीढियां चढकर संगमरमरी चबूतरे पर पहुंचते हैं तो वे उस स्थान को पैरों से थपथपा कर देखें, जिससे पोली-सी आवाज़ आती है। यदि यह शिला निकाली जाए तो चबूतरे के अन्दर जो सैकड़ों कक्ष हैं उनमें उतरने के जीने दिखाई देंगे। एक बार वहां के पुरातत्व अधिकारी श्री आर के वर्मा ने यह शिला निकलवाई तो उसमें अन्दर मोटी दीवार की गहराई में एक जीना उतरता दिखाई दिया। लेकिन दिल्ली स्थित वरिष्ठ पुरातत्व अधिकारी के कहने पर उसे पुन: बन्द करा दिया गया। इन कक्षों में वे देव प्रतिमाएं बन्द हैं जिन्हें शाहजहाँ ने पूरे मन्दिर से निकलवा कर इन कक्षों में ठूंस दिया था और इनका द्वार बन्द कर दिया गया। पुरातत्व विभाग को इन्हें पुन: खुलवाना चाहिये।
यमुना तट
(9) विश्व की अन्य कोई भी इस्लाम से सम्बन्धित ईमारत किसी नदी के तट पर नहीं है। लेकिन नदियों के किनारों पर मन्दिर बनाने के प्रथा अति प्राचीन है।
मूर्तियों वाला कक्ष
(10) मुख्य द्वार के आगे अन्दर जाने के लिए दाएं-बाएं कोने पर दो द्वार बने हुए हैं, किन्तु वे ईटों से चुनवा दिए गये हैं। सन 1932-34 में उसमें दरार पड़ने से अन्दर कई स्तम्भों वाला एक कक्ष दिखाई दिया, उन स्तम्भों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां खुदी हुई हैं। किन्तु उन दरारों को पुन: भरवा दिया गया। ताजमहल वस्तुत: सात मंजिला ईमारत है। एक मंजिल उपर और शेष छ: मंजिल नीचे हैं, जो अभी तक बन्द हैं तथा जिन्हें पुरातत्व विभाग द्वारा कभी खोला नहीं गया। यदि सातों मंजिलों के सैकड़ों कक्ष खुलवाकर देखे जाएं तो वहां निश्चय ही देवमूर्तियां और संस्कृत शिलालेख प्राप्त होंगे।
अभी हाल ही में सुन्नी वक्फ बोर्ड के नये दावे के बाद ताजमहल एक बार पुन: विवादों के घेरे में आ गया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड का दावा है कि ताजमहल पर उसका हक है क्योंकि शाहजहाँ ने अपनी वसीयत में ताज के रख-रखाव का जिम्मा उसे दिया था। वहीं दूसरी ओर दीदार-ए-अंजुमन नाम की एक दूसरी संस्था ने भी ताज पर अपना दावा ठोक दिया है। भला यह सब देखकर हिन्दूवादी कैसे चुप रहते, इसलिये उन्होने भी दावा किया है कि ताजमहल मूलत: एक मन्दिर है और इसे फिर से हिन्दुओं को सौंप देना चाहिये। संघर्ष दलों के गठन में महारथी श्री विनय कटियार ने बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी के बाद अब ताजमहल की मुक्ति के लिये भोलेनाथ सेना को गठित करने की घोषणा भी लगे हाथों कर दी है। श्री विनय कटियार के इस विश्वास का आधार विख्यात इतिहासकार श्री पी एन ओक द्वारा लिखित पुस्तक The Taj Mahal is a Temple Place है। इन सभी पक्षों को लट्ठम-लट्ठा होते देखकर मुझे भी इस पुस्तक को पढने की इच्छा हुई। श्री ओक द्वारा दिये गये तर्क काफी ठोस प्रतीत होते हैं, कुछ प्रमुख तर्क पढें और बताएं कि आपका इस बारे में क्या कहना है।
मन्दिर परम्परा
(1) ताजमहल संस्कृत शब्द तेजोमहालय यानि शिव मन्दिर का अपभ्रंश होने से पता चलता है कि अग्रेश्वर महादेव अर्थात अग्रनगर के नाथ ईश्वर शंकर जी को यहां स्थापित किया गया है।
(2) ताजमहल के शिखर पर लगा धातु चिह्न चांद-तारा नहीं अपितु स्पष्टत: त्रिशूल है, जिसपर नीचे की ओर स्वस्तिक का चिह्न अभी भी देखा जा सकता है। कश्मीर में अभी ऐसे कई मन्दिर हैं, जहां शिखर पर इसी प्रकार के स्वस्तिक चिह्न-अंकित त्रिशूल लगे हुए हैं।
(3) संगमरमरी तहखाने में संगमरमरी जाली के शिखर पर बने कलश कुल 108 हैं, जो संख्या पवित्र हिन्दू मन्दिरों की परम्परा है।
कार्बन-14 जाँच
(4) श्री ओक की इस पुस्तक को पढकर एक अमेरिकन प्राध्यापक Marvin Mills भारत आए थे। ताजमहल के पिछवाड़े में यमुना के किनारे पर ताजमहल का एक प्राचीन लकड़ी का टूटा हुआ द्वार है, उसका एक टुकड़ा वे ले गये। उस टुकड़े की उन्होनें New York में Carbon-14 जाँच कराई। उससे भी यही सिद्ध हुआ कि ताजमहल शाहजहाँ के काल से सैकड़ों वर्ष पूर्व बनी ईमारत है।
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8 Comments:
जब १९९० के दशक में हिंदुहितो की रक्षा का दम भरने वाली भाजपा मंदिर मुद्दे से कुर्सी पाते ही किनारे हो गयी , जिसने बांग्लादेशी प्रवासियो तक को नहीं निकलवाया तो अब सेक्यूलर सरकार से क्या उम्मीद रखी जाये| उन्हे किसी पागल कुत्ते ने काटा है जो ताजमहल के हिंदु मंदिर होने कि जाँच करेंगे| सबको पता है हिंदु वोटबैंक कभी नही बन सकता इसलिए वे सब चुप बैयकर तमाशा देखेंगे|
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Atul Arora, at 11:15 PM
अब क्या किया जाना चाहिए और क्या नहीं, इस की बहस किए बिना, इस में तो कोई सन्देह नहीं है कि मुस्लिम आक्रामकों ने बलात् धर्म परिवर्तनों के साथ-साथ बलात् धर्मस्थान परिवर्तन किए हैं। ताजमहल ऐसे स्थानों की लम्बी सूची में हो, इस की सम्भावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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Raman Kaul, at 9:13 AM
वोटबैंक बनाने का विचार ही बहुत ख़तरनाक विचार है, चाहे वो किसी भी तरह का वोट बैंक क्यों न हो।
बलात धर्म परिवर्तन और बलात धर्म-स्थान परिवर्तन दोनो ऐतिहासिक हक़ीक़त है, इस बात को सभी राजनैतिक दल भलि भाँति जानते हैं। मुश्किल यही है कि ऐसे किसी मसले को सुलझाने की बजाए नेता उसकी आँच भड़का-कर आम आदमी का टिक्का मसाला भूनते हैं, और मसला वहीं का वहीं रहता है। इन पुराने मसलों को छोड़िये भी अभी आज के दिन सरकारी नाक के नीचे क्या बलात धर्म परिवर्तन नहीं होता? कश्मीरी पंडित अपने घर से बाहर (इनके लिये भी कोई बस चलेगी क्या?) और बांग्लादेशी अंदर वाह भाई वाह क्या धर्मनिरपेक्षता है। इसमें तो सरकार को खुद चाहिए की अगर ऐसे साक्ष्य हैं तो वही आगे बढकर इसे निस्पक्ष रूप से सबके सामने लाए, बजाए कि एक और बजरंग दल को खड़ा होने दिया जाए। और इसी तरह जितने भी तरह के ज़िहादी हैं सबको (क़ानूनपूर्वक) अरब सागर में छोड़ आया जाए।
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Vijay Thakur, at 12:41 PM
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sujeet singh, at 12:24 AM
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sujeet singh, at 12:25 AM
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Anonymous, at 6:35 AM
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Anonymous, at 6:36 AM
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