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Monday, May 02, 2005

आँखें खोलने वाले दो समाचार

आज सुबह उठकर जब मैंने अख़बार खोला, तो एक ख़बर पर नज़रें थम गयीं – ‘‘इंडोनेशियाई मुस्‍लिमों के नायकों में हैं राम, कृष्‍ण, हनुमान और गणेश।’’ इंडोनेशिया विश्‍व में सर्वाधिक मस्‍लिम आबादी वाला देश है, क़रीब 88 प्रतिशत मुस्‍लिम और 3 प्रतिशत हिन्‍दू इण्‍डोनेशिया में रहते हैं। वहां की मुद्रा पर ‘गणेश’ की छवि अंकित है। गगनचुम्‍बी इमारतों के बीच जगह-जगह हनुमान, राम, कृष्‍ण और अर्जुन (वैसे अर्जुन की मूर्ति आपने कहीं हिन्‍दुस्‍तान में देखी है?) की मूर्तियां स्‍थापित हैं, जिससे उनकी धर्मनिरपेक्षता पर कोई आंच नहीं आती। वहां के संस्‍कृति मंत्रालय ने डचों पर विजय के प्रतीक रूप में स्‍वतंत्रता मैदान में अर्जुन रथ स्‍थापित किया है। एशिया-अफ्रीका शिखर सम्‍मेलन में भाग लेने गये प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके साथ गया भारतीय पत्रकारों का प्रतिनिधि मण्‍डल यह देखकर चकित रह गया।

शाम को टीवी पर एक दूसरी ख़बर देखी। BA II, दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय में पिछले 25 सालों से इतिहास की एक पुस्‍तक पढ़ाई जा रही है। लेखक श्री सि‍द्दकी के अनुसार गांधी जी का अहिंसा आन्‍दोलन हिन्‍दूवादी था और यह पराजय का प्रतीक है। सरदार पटेल हिन्‍दुओं से मिले हुए थे और साम्‍प्रदायिक दंगों को बढ़ावा देते थे। संघ फासिस्‍ट संस्‍था है और सरसंघचालक तानाशाह की तरह होता है। संघ की शाखाओं में दूसरे धर्मों के प्रति नफरत सिखाई जाती है। संविधान निहित हिन्‍दू स्‍वार्थों की रक्षा के लिए बनाया गया ‍था। सुभाषचन्‍द्र बोस ने फासिस्‍टों से दोस्‍ती करके भारी भूल की, उन्‍हें सोवियत रूस से दोस्‍ती करनी चाहिये थी जोकि दुनिया की सबसे बड़ी शक्‍ति है।

अब मुझे पूरा यकीन हो चला है कि भारत एक सेकुलर राष्‍ट्र है, साम्‍प्रदायिक मुल्‍क तो इण्‍डोनेशिया वगैरह हैं।

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7 Comments:

  • सांप्रदायिक (या आतंकवादी) वो देश है जिसपर अमरीका का ठप्पा लगा हो। इसी तरह भारत में धर्मनिरपेक्ष वही माना जा सकता है जो हिन्दू धर्म और सँस्कृति को पानी पी पी कर गरिया सके।

    By Blogger Vijay Thakur, at 7:24 AM  

  • This blog is pretty good

    By Anonymous Anonymous, at 12:40 AM  

  • ये चिंतन का शुरुआती दौर है मेरे भाई. गांधी-सुभाष के उठाए क़दम अपनी-अपनी जगह बिल्कुल ठीक थे. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जिस तरह के अंतरराष्ट्रीय समीकरण थे, उनका फ़ायदा भारत को किस तरह मिल सकता है - ये सवाल दोनों नेताऒ के सामने था. एक सविनय अवज्ञा तो दूजा सशस्त्र संघर्ष के ज़रिए मुल्क़ को आज़ाद कराना चाहता था.
    सेक्यूलर और कम्यूनल जैसा व्यवहार सापेक्ष होता है. धर्म, संस्कार और परंपराऎ जैसे तत्व अगर जीवन के सामने आदर्श खडा करते हैं तो मुसीबतें भी लेकर आते हैं. धर्म क्रांति की राह में बाधा भी बन सकता है तो प्रेरक भी. इसी तरह परंपराए और संस्कार कभी- कभी नवीनता की राह मे कांटे बिछा देते हैं. देखते नही.. औरों के अनुभवों को धता बताते हुए कैसे नये रिकार्ड बना लेते हैं दुस्साहसी लोग? ये वाक़ई विरोधाभासी जगत है और यही सम्यक दर्शन भी. लादेन का रहीम अगर दुनिया को तबाही के मुहाने पर खडा कर सकता है तो गांधी का राम देश को आज़ादी भी दिला सकता है.
    भारत के स्वरूप में एकरूपता देखना या संस्कृति में प्राचीनता के अवशेष चिन्ह तलाशने की ज़रूरत क्या है. मेरे अतीत का क्या करोगे जब वर्तमान ही दुरुस्त नहीं. क्योंकि सारा संघर्ष ही अतीत गाथा के आलाप से शुरू हुआ है. हम और आप पिछले दो हज़ार साल में बदल नही गए? हमारा खान - पान, रहन- सहन और पहनावा सब कुछ तो बदल गया है. इंडोनेशिया में पुरातन के महत्व को समझा है लोगों ने तो वहां पूरा मुल्क़ कैसे हिन्दुऒ से मुस्लिमों का हो गया. और मेरे देश में ऐसा नही हो सका. क्या ये हमने सोचा है?

    अपने चेहरे जो ज़ाहिर है छुपाऎ कैसे,
    तेरे चेहरे से जो ज़ाहिर है बताऎ कैसे.
    घर सजाने का तसव्वुर तो बहोत बाद का है,
    पहले ये तय हो कि इस घर को बचाऎ कैसे.

    By Blogger Neeraj, at 10:23 PM  

  • प्रतिक भाई साहब आपने पुछा है कि भारत मे किसी ने अर्जुन की मुर्ति देखी है या नही मे आपसे पुछ्ना चाहता हुँ कि आप मे से किसी ने भारत मे भगवान श्री राम पर कोइ डाक टिकट देखा है? शायद कोइ मानेगा नहीँ पर यह सच है कि भारत एसा देश है जहाँ भगवान श्री राम पर डाक विभाग ने आज तक कोइ टिकट जारी नही किया है!!!!!
    जब कि इन्डोनेशिया, मौरीशस जैसे कई मुस्लिम बहुमति वले देशो के डाक विभाग ने राम, सीत लक्ष्मण ओर हनुमान जी पर डाक टिकट् जारी किये है!!!!!


    सागर चन्द नाहर

    By Blogger sagar nahar, at 6:32 PM  

  • हिन्‍दुत्‍व अथवा हिन्‍दू धर्म
    हिन्‍दुत्‍व एक जीवन पद्धति अथवा जीवन दर्शन है जो धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को परम लक्ष्‍य मानकर व्‍यक्ति या समाज को नैतिक, भौतिक, मानसि‍क, एवं आध्‍यात्मिक उन्‍नति के अवसर प्रदान करता है। आज हम जिस संस्‍कृति को हिन्‍दू संस्‍कृति के रूप में जानते हैं और जिसे भारतीय या भारतीय मूल के लोग सनातन धर्म या शाश्‍वत नियम कहते हैं वह उस मजहब से बड़ा सिद्धान्‍त है जिसे पश्चिम के लोग समझते हैं।
    अधिक के लिये देखियेः http://vishwahindusamaj.com
    चिठ्ठाजगत में स्वागतम्http://vishwahindusamaj.blogspot.com

    By Anonymous विश्व हिन्दू समाज, at 10:48 PM  

  • hi i am pushpendra saini,
    i am software eng.
    mumbai

    By Blogger pushpendrasaini, at 5:22 PM  

  • i am pushpendra saini ,
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    so if i have mistake pls inform me

    By Blogger pushpendrasaini, at 5:23 PM  

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