Remove Ad
Movie Blogs | Cricket Blogs | Jyotish Blogs | Hindi Blogs | Filmy2 Timepass | Hindi Songs | Bollywood Gossips | Indian Blogs | IPL 2009

Monday, December 05, 2005

‘‘कुछ बतकही’’ के लेखक ‘‘धनञ्जय शर्मा’’ नहीं रहे

मेरे ख्‍याल से शायद यह बात आप लोगों को मालूम नहीं है। अभी-अभी जब मैंने यह चिट्ठा खोला तो उनके किसी परिचित ‘विवेक’ की निम्न टिप्‍पणी उनकी आखिरी प्रविष्टि पर पायी –

"आओ हम सब मिलकर इस धरती को स्वर्ग बनाएँ,
हम सब स्वर्गीय हो जाएँ ।"

यह थे धनन्जय के आखिरी ब्लॉग की शुरूआती शब्द. जैसे कि उन्हें पूर्वानुमान था.

मैं धनन्जय शर्मा से कभी नहीं मिला.

जब मैं लिनक्स के स्थानीयकरण में रूचि के चलते गूगल पर हिन्दी में कुछ खोज रहा था, तो उनके वेबपृष्ट "हिन्दी में लिनक्स, लिनक्स में हिन्दी" पर नज़र पड़ी.

तब मुझे पता चला की गुजरात के जामनगर में बैठे इस इन्सान ने अकेले ही, पूरे मैन्ड्रेक लिनक्स का हिन्दी अनुवाद कर डाला है.

अनुवादों को प्राप्त करने के सिलसिले में उनसे एक बार इमेल का अदान प्रदान भी हुआ. बस, उन्हें मैं इतना ही जानता हुँ.

खबर मिली की उनका आकस्मिक निधन हो गया है. उनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानता, पर धनन्जय, आपके द्वारा किया परिश्रम और आपका योगदान बहुत सराहनीय है.

आपने भारत की जनता तक उनकी भाषा में एक मुक्त व मुफ्त सॉफ्टवेयर के विकास के लिये इतना परीश्रम किया. आपने अकेले ही समूचे मैन्ड्रेक वितरण का हिन्दी अनुवाद कर डाला. यह कोई आसान काम नहीं, निश्चय ही आपने अपने जीवन के कई बहुमूल्य पल इस पर लगाये.

क्या ये सब व्यर्थ जायेगा? क्या जिन भारतीयों के लिये आपने इतना परिश्रम किया वो आपको जानते भी हैं? क्या यह सब समय की धूल में मिट कर रह जायेगा. हम मध्यम वर्ग के भारतवासी अपने सनसनीखेज मीडिया द्वारा प्रस्तुत नकली नायकों में ही काफी मशगूल रहते हैं. हममें से बहुतों को अपनी भाषा और अपनी संस्कृति पर कोई खास गर्व भी नहीं. अगली पीढ़ी के बच्चे अब अंग्रेज़ी बोलना ही ज्यादा पसंद करते हैं, यहां तक की हिन्दी का प्रयोग "फ़ैशनेबल" नहीं समझा जाता.

अगर हमारी भाषायें आज से 100 साल बाद तक इन्टर्नेट और कम्प्यूटर के युग में भी जीवित रह गयीं, तो मुझे यकीन है कि इस ब्लॉग को कोई 100 साल बाद पड़ रहा होगा. और उस व्यक्ति को यह बताने की आव्श्यकता नहीं पड़ेगी की धनंजय शर्मा कौन था. उस समय तक लोग धनंजय शर्मा के हिन्दी में लिनक्स संचालन तंत्र के विकास के लिये किये गये महत्वपूर्ण योगदान से भलि भांति परिचित होंगे.

क्या ये सपना सच होगा?

If you're new , subscribe RSS feed OR Email Alerts.
Favorite Blogs: Hindi Songs | Vedic Astrology | IPL 2009 Cricket in Hindi.

4 Comments:

Blogger Hindi Blogger said...

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति, और उनके परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहने का साहस दे. दिवंगत आत्मा को हमारी श्रद्धांजलि!

3:35 AM  
Blogger अनुनाद सिंह said...

बहुत दुखद है यह समाचार ! एक कर्मयोगी , जिसने एक इलाके का अंधकार अकेले मिटाया था | हम उनके चरित्र औ कृतित्व से कुछ ग्रहण करें , यही उनको श्रद्धान्जलि है |

8:51 AM  
Blogger Raviratlami said...

धनंजय शर्मा से मेरी भी मुलाकात कभी नहीं हुई, परंतु लिनक्स के हिन्दी अनुवादों से जुड़े रहने के कारण उनसे बहुतबार ई-मेल के जरिए संपर्क हुआ था. वे एस सेल्फ ड्रिवन व्यक्ति थे. मेनड्रेक के अलावा उन्होंने विनएम्प, पो-एडिट तथा ऐसे ही दर्जनों अन्य अनुप्रयोगों के हिन्दी अनुवाद किए थे.

उनके अंतिम पोस्ट से यह प्रतीत होता है कि शायद जीवन की निरर्थकता को उन्होंने समझ लिया था, जो कि शायद सही नहीं था.

काश!, हम कुछ बात उनसे कर पाते तो शायद उनकी सोच में कुछ परिवर्तन हो सकता था...

बहरहाल, ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे.

यह तो मेरे लिए व्यक्तिगत नुकसान की तरह है.

10:28 AM  
Blogger Raviratlami said...

This post has been removed by a blog administrator.

10:29 AM  

Post a Comment

<< Home