Remove Ad
Movie Blogs | Cricket Blogs | Jyotish Blogs | Hindi Blogs | Filmy2 Timepass | Hindi Songs | Bollywood Gossips | Indian Blogs | IPL 2009

Monday, December 05, 2005

Ideal of Art

कला का आदर्श

यूनानी कला का रहस्‍य है प्रकृति के सूक्ष्‍मतम ब्‍योरों तक का अनुकरण करना, पर भारतीय कला का रहस्‍य है आदर्श की अभिव्‍यक्ति करना। यूनानी चित्रकार की सारी शक्ति कदाचित् मांस के एक टुकड़े को चित्रित करने में ही व्‍यय हो जाती है, और वह उसमें इतना सफल होता है कि यदि कुत्ता उसे देख ले, तो उसे सचमुच का मांस समझकर खाने दौड़ आये। किन्‍तु इस प्रकार की प्रकृति के अनुकरण में क्‍या गौरव है? कुत्ते के सामने यथार्थ मांस का एक टुकड़ा की क्‍यों न डाल दिया जाय?

दूसरी ओर, आदर्श को – अतीन्द्रिय अवस्‍था को – अभिव्‍यक्त करने की भारतीय प्रवृत्ति भद्दे और कुरूप बिम्‍बों के चित्रण में विकृत हो गयी है। वास्‍तविक कला की उपमा लिली से दी जा सकती है, जो कि पृथ्‍वी से उत्पन्‍न होती है, उसीसे अपना खाद्य ग्रहण करती है, उसके संस्‍पर्श में रहती है, किन्‍तु फिर भी उससे ऊपर ही उठी रहती है। इसी प्रकार कला को भी प्रकृति के सम्‍पर्क में होना चाहिए – क्‍योंकि यह सम्‍पर्क न रहने पर कला का अध:पतन हो जाता है – पर साथ ही कला का प्रकृति से ऊंचा उठा रहना भी आवश्‍यक है।

कला सौन्‍दर्य की अभिव्‍यक्ति है। प्रत्‍येक वस्‍तु कलापूर्ण होनी चाहिए।

वास्‍तु और साधारण ईमारत में अन्‍तर यह है कि प्रथम एक भाव व्‍यक्त करता है, जब कि दूसरी आर्थिक सिद्धान्‍तों पर निर्मित एक ईमारत मात्र है। जड़ पदार्थ का महत्व भावों को व्‍यक्त कर सकने की उसकी क्षमता पर ही निर्भर है।

हमारे भगवान् श्री रामकृष्‍ण देव में कला-शक्ति का बड़ा उच्‍च विकास हुआ था, और वे कहा करते थे कि बिना इस शक्ति के कोई भी व्‍यक्ति यथार्थ आध्‍यात्मिक नहीं हो स‍कता।

कला में ध्‍यान प्रधान वस्‍तु पर केन्द्रित होना चाहिए। नाटक सब कलाओं में कठिनतम है। उसमें दो चीज़ों को सन्‍तुष्ट करना पड़ता है – पहले, कान; दूसरे, आँखें। दृश्‍य का चित्रण करने में, यदि एक ही चीज़ का अंकन हो जाय, तो काफ़ी है; परन्‍तु अनेक विषयों का चित्रांकन करके भी केन्द्रिय रस अक्षुण्‍ण रख पाना बहुत कठिन है। दूसरी मुश्किल चीज़ है मंच-व्‍यवस्‍था; यानी विविध वस्‍तुओं को इस तरह विन्‍यस्‍त करना कि केन्द्रिय रस अक्षुण्‍ण बना रहे।

(साभार: विवेकानन्‍द साहित्‍य)

If you're new , subscribe RSS feed OR Email Alerts.
Favorite Blogs: Hindi Songs | Vedic Astrology | IPL 2009 Cricket in Hindi.

4 Comments:

Anonymous Anonymous said...

good article

10:54 AM  
Blogger महावीर said...

बहुत सुंदर तथा सारगर्भित लेख है।

"दूसरी ओर, आदर्श को – अतीन्द्रिय अवस्‍था को – अभिव्‍यक्त करने की भारतीय प्रवृत्ति भद्दे और कुरूप बिम्‍बों के चित्रण में विकृत हो गयी है।"- बहुत सच्चाई है इसमें!
महावीर शर्मा

4:18 AM  
Anonymous Anonymous said...

दूसरी ओर, आदर्श को – अतीन्द्रिय अवस्‍था को – अभिव्‍यक्त करने की भारतीय प्रवृत्ति भद्दे और कुरूप बिम्‍बों के चित्रण में विकृत हो गयी है।"- बहुत सच्चाई है इसमें!

6:00 PM  
Blogger रुपेश कुमार तिवारी said...

उत्तम लेख है | हार्दिक शुभकामनायें !

5:55 PM  

Post a Comment

<< Home