Remove Ad
Hindi Movies | Hindi Portal | Hindi News | Hindi Jyotish | T20 Cricket 2009

Thursday, October 26, 2006

किसके सर फोड़ा जाए हार का ठीकरा

Indian Captain Rahul Dravid and coach Greg Chappellअपने सिर पर इस ठीकरे को फुड़वाने के दो प्रबल दावेदार हैं - ग्रेग चैपल और राहुल द्रविड़। दोनों ही भारत की हार को पक्का करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। वेस्टइण्डीज़ जैसी फिसड्डी टीम पर भी जीत हासिल करना इनके लिए नामुमकिन साबित हो रहा है। वेस्टइण्डीज़ से हुए आख़िरी छ: मुक़ाबलों में से पाँच में भारत को हार का मुँह देखना पड़ा है। सवाल यह है कि गुरू ग्रेग अपने मूर्खतापूर्ण प्रयोगों को कब बन्द करेंगे। ये अजीबो-ग़रीब प्रयोग न केवल बार-बार भारत की हार का कारण बन रहे हैं, बल्कि खिलाड़ियों का मनोबल भी मटिया-मेट कर रहे हैं। फिर भी ग्रेग चैपल का कहना है कि वो इन प्रयोगों का जारी रखेंगे। अब तो भगवान ही मालिक है भारतीय क्रिकेट टीम का।

लेकिन इसके ज़िम्मेदार सिर्फ़ ग्रेग चैपल ही नहीं हैं, बल्कि राहुल द्रविड़ की भी इसमें भूमिका है। राहुल द्रविड़ भले ही एक अच्छे बल्लेबाज़ हों, लेकिन कप्तान के तौर पर वे विफल साबित हो रहे हैं। कप्तान में जो आक्रामकता और जोश चाहिए, वह राहुल द्रविड़ से नदारद है। कल फ़ील्डिंग के लिए आते वक़्त ही उनके चेहरे पर निराशा का भाव साफ़ देखा जा सकता था। कप्तान को पूरे दल में उत्साह और जोश फूँकने के लिए पहले इन गुणों से खुद लबरेज़ होना चाहिए; लेकिन जब द्रविड़ खुद ही हताश नज़र आते हैं तो टीम का क्या हाल होता होगा, आप खुद ही अन्दाज़ा लगा सकते हैं।

इसके अलावा अब हमें भारतीय टीम को हारते हुए देखने की आदत डाल लेनी चाहिए। क्योंकि जब तक योग्यता और प्रदर्शन पर राजनीति हावी रहेगी, तब तक जीत दूर ही रहेगी। टीम प्रबन्धन न जाने क्यों सहवाग को उसी तरह चिपकाए हुए है, जिस तरह बन्दरिया अपने बच्चे को खुद से हमेशा चिपकाए रहती है। सहवाग का टीम में होना केवल क्रिकेट में फैली राजनीति को ही दर्शाता है, जबकि कई क़ाबिल लोग बाहर ही बैठे रह जाते हैं। पिछले तीस मैचों में सहवाग का रन औसत गांगुली से भी कम है, तो फिर ये दोहरा मापदण्ड नहीं तो और क्या है?

www.CrickBlogs.com

टैग : , , , , ,

If you're new , subscribe RSS feed OR Email Alerts.
Favorite: Hindi News | Hindi Movies/ Hindi Songs | Vedic Astrology | T20 Cricket in Hindi.

5 Comments:

Blogger Punit Pandey said...

यह मामला उतना सीधा नहीं है जितना दिखता है। चयनकर्ताओं का और प्रयोजकों का जो अन्‍दरुनी दखल है और जो यह बोर्ड की राजनीति है वह काफी हद तक इसकी जिम्‍मेदार है। क्‍या कभी सोचा है कि वीरेन्‍द्र सहवाग के टीम से बाहर जाने से प्रायोजकों का कितना नुकसान होगा ?

3:06 PM  
Blogger संजय बेंगाणी said...

क्रिकेट एक व्यवसाय बन गया हैं, पर समझमें नहीं आता हारती टीम से कौन से लाभ कमाए जा सकते हैं. सबसे पहले तो राजनेताओं से क्रिकेट को मुक्त करना चाहिए.

4:26 PM  
Blogger गिरिराज जोशी said...

अरे प्रतिक भाई वेस्टइण्डीज़ की पीठ काहे नहीं ठोकते, जो अच्छा खेलेगा वो जीतेगा ही। :)

4:38 PM  
Blogger Raag said...

मैच के अंतिम क्षणों में हम प्रतीक जी से इन्ही बातों पर चर्चा कर रहे थे। थोड़े में कहें तो भारतीय टीम ने नरक कर दिया है। और ये गुरू ग्रेग तो यमराज ही बन बैठे है।

7:14 PM  
Anonymous nitin hindustani said...

Prateek ji,

you can add my blog to your blog


Nitin Hindustani.

12:06 PM  

Post a Comment

<< Home

Web Analytics