Rawalpindi Express Got Derailed
पटरी से उतरी रावलपिण्डी ऐक्सप्रेस
ये पाकिस्तान वाले भी कमाल के लोग हैं। खुद ही अपनी रावलपिंडी ऐक्सप्रेस को धकिया के पटरियों से उतार दिया। इतना ही नहीं, दुनिया के सामने रावलपिण्डी ऐक्सप्रेस की तेज़ी का राज़ भी खोल दिया कि काहे से ये सरपट भागी जा रही थी दनादन। यहाँ हम अपने पठान को दूध-घी खिला-पिला रहे थे, सुबह-सांझ बदाम घिस के देते थे; फिर भी क्या मजाल कि लड़का १२० के ऊपर फेंक दे और वहाँ उनने धाँय-फाँय मचा रखी थी। ससुरी बड़ी टेंशन थी, लेकिन अब दिल को नैक तसल्ली हुई। काहे कि यहाँ हमारा दूध-घी वगैरह कुछ बर्बाद ज़रूर हुआ, लेकिन वहाँ वो महँगा प्रोटीन पाउडर खिला रहे थे ससुरों को। फिर भी वो तेज़ नहीं फेंकेगा, तो क्या हमारी छिरिया तेज़ फेंकेगी... हैं...? ख़ैर, उनने रावलपिण्डी ऐक्सप्रेस के साथ जो किया सो किया, लेकिन सुपरफ़ास्ट के साथ में पैसेंजर को भी हिल्ले लगा दिया। ये कहाँ का इंसाफ़ है भई?
हमें तो लगता है कि आईसीसी की इस नई नीति के नाम पर पीसीबी के माई-बाप अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। जो भी उनकी आँख की किरकिरी था, उसे दूध में से मक्खी की तरह निकालने का कोई-न-कोई बहाना तो चाहिए ही था। सो ये मौक़ा खूब हाथ लगा और उनने क्या सुपरफ़ास्ट क्या पैसेंजर, जिसे मन आया उसे पंक्चर कर दिया साइकिल की नाईं। साइकिल तो फिर भी जल्दी ही चलने लायक हो जाती है, लेकिन ऐक्सप्रेस को तो दो साल के लिए लूप लाइन पर टिका दिया। हमें जान पड़ता है कि दो साल तो बस एक बहाना है, मक़सद तो इस सुपरफ़ास्ट को हमेशा के लिए म्यूजियम में लगाना है। यानि कि पीसीबी का मक़सद है – रावलपिंडी ऐक्सप्रेस के करियर का अन्त तुरन्त।
अब पूछो कि हम इत्ता सब काहे सोच-विचार रहे हैं। तो वो इसलिए चचे, क्योंकि हम ख़ुश भी हैं और ग़मगीन भी। ख़ुश इसलिए कि पहले से टूटी-फूटी पाकिस्तान की टीम इससे और खचाड़ा हो गई और दु:खी इससे कि हम देखना चाहते थे कि चैम्पियन्स ट्रॉफ़ी में ‘रावलपिण्डी ऐक्सप्रेस’ ‘मुम्बई जंक्शन’ पर टिक पाती है या नहीं? ख़ैर, शोएब के लिए एक गाना श्रद्धांजलि के तौर पर – दिल के अरमाँ आँसुओं में बह गए... हमारी आवाज़ फटे बाँस जैसी है, जिसकी ठीक-ठाक हो वो हमारी तरफ़ से शोएब के लिए गा देना ज़रा। और आख़िर में जाते-जाते शोएब को एक नेक सलाह – कुछ दिन पहले तुम्हें बॉलीवुड के जिन प्रोड्यूसर महाशय ने अपनी फिल्म में विलेन का रोल देना चाहा था और तुमने नखरे दिखा कर मना कर दिया था, अब उड़के सीधे उनके चरणों में गिर जैयो और पैर पकड़ कर माफ़ी मांग लियो भाई। आख़िर राशन-पानी का सवाल है।
टैग : Hindi, Cricket, Rawalpindi Express, Shoaib Akhtar, Mohammad Asif, हिन्दी
ये पाकिस्तान वाले भी कमाल के लोग हैं। खुद ही अपनी रावलपिंडी ऐक्सप्रेस को धकिया के पटरियों से उतार दिया। इतना ही नहीं, दुनिया के सामने रावलपिण्डी ऐक्सप्रेस की तेज़ी का राज़ भी खोल दिया कि काहे से ये सरपट भागी जा रही थी दनादन। यहाँ हम अपने पठान को दूध-घी खिला-पिला रहे थे, सुबह-सांझ बदाम घिस के देते थे; फिर भी क्या मजाल कि लड़का १२० के ऊपर फेंक दे और वहाँ उनने धाँय-फाँय मचा रखी थी। ससुरी बड़ी टेंशन थी, लेकिन अब दिल को नैक तसल्ली हुई। काहे कि यहाँ हमारा दूध-घी वगैरह कुछ बर्बाद ज़रूर हुआ, लेकिन वहाँ वो महँगा प्रोटीन पाउडर खिला रहे थे ससुरों को। फिर भी वो तेज़ नहीं फेंकेगा, तो क्या हमारी छिरिया तेज़ फेंकेगी... हैं...? ख़ैर, उनने रावलपिण्डी ऐक्सप्रेस के साथ जो किया सो किया, लेकिन सुपरफ़ास्ट के साथ में पैसेंजर को भी हिल्ले लगा दिया। ये कहाँ का इंसाफ़ है भई?हमें तो लगता है कि आईसीसी की इस नई नीति के नाम पर पीसीबी के माई-बाप अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। जो भी उनकी आँख की किरकिरी था, उसे दूध में से मक्खी की तरह निकालने का कोई-न-कोई बहाना तो चाहिए ही था। सो ये मौक़ा खूब हाथ लगा और उनने क्या सुपरफ़ास्ट क्या पैसेंजर, जिसे मन आया उसे पंक्चर कर दिया साइकिल की नाईं। साइकिल तो फिर भी जल्दी ही चलने लायक हो जाती है, लेकिन ऐक्सप्रेस को तो दो साल के लिए लूप लाइन पर टिका दिया। हमें जान पड़ता है कि दो साल तो बस एक बहाना है, मक़सद तो इस सुपरफ़ास्ट को हमेशा के लिए म्यूजियम में लगाना है। यानि कि पीसीबी का मक़सद है – रावलपिंडी ऐक्सप्रेस के करियर का अन्त तुरन्त।
अब पूछो कि हम इत्ता सब काहे सोच-विचार रहे हैं। तो वो इसलिए चचे, क्योंकि हम ख़ुश भी हैं और ग़मगीन भी। ख़ुश इसलिए कि पहले से टूटी-फूटी पाकिस्तान की टीम इससे और खचाड़ा हो गई और दु:खी इससे कि हम देखना चाहते थे कि चैम्पियन्स ट्रॉफ़ी में ‘रावलपिण्डी ऐक्सप्रेस’ ‘मुम्बई जंक्शन’ पर टिक पाती है या नहीं? ख़ैर, शोएब के लिए एक गाना श्रद्धांजलि के तौर पर – दिल के अरमाँ आँसुओं में बह गए... हमारी आवाज़ फटे बाँस जैसी है, जिसकी ठीक-ठाक हो वो हमारी तरफ़ से शोएब के लिए गा देना ज़रा। और आख़िर में जाते-जाते शोएब को एक नेक सलाह – कुछ दिन पहले तुम्हें बॉलीवुड के जिन प्रोड्यूसर महाशय ने अपनी फिल्म में विलेन का रोल देना चाहा था और तुमने नखरे दिखा कर मना कर दिया था, अब उड़के सीधे उनके चरणों में गिर जैयो और पैर पकड़ कर माफ़ी मांग लियो भाई। आख़िर राशन-पानी का सवाल है।
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3 Comments:
चकाचक!!
भई वाह! जितना मज़ा खबर में नहीं उससे ज्यादा तो बखर में निकल आया.
बखर - ब्लाग खबर!! :))
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Vijay Wadnere, at 4:26 PM
पीसीबी अंदरुनी राजनीति के लिए मशहूर (i mean बदनाम ) है, सो आपका शक गलत नहीं है।
CrickBlogs.Com
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Punit Pandey, at 11:52 PM
कुछ भी हो भाया पाक ने मैच तो जीत लिया
भारत तो इतने पे फुस्स ही हो जाता
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भुवनेश शर्मा, at 2:02 AM
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