शास्त्री, चैपल और रैना का टोटका
आज सुबह-सुबह मैंने अख़बार खोला (अर्र... ग़लत मत समझा करो, आज ही नहीं रोज़ ही खोलता हूँ यार और पढ़ता भी हूँ) तो पाया कि बांग्लादेश दौरे के लिए रवि शास्त्री को भारतीय क्रिकेट टीम का कोच और प्रबन्धक बना दिया गया है। "रवि शास्त्री" - यह नाम सुनते ही क्या याद आता है? याद आता है एक महा खुटर-खुटर बल्लेबाज़ जो शायद ही कभी रन बनाता हो। जिसके क्रीज़ पर आते ही जनता हूटिंग शुरु कर देती हो, हल्ला मचाने लगती हो। जिसे देखते ही लोग अपना टीवी बन्द कर देते हों। और जो फिर भी 'ऑलराउण्डर' कहलाता हो।यह ख़बर सुनकर मुझे बड़ा धक्का लगा। इतना धक्का लगा कि हाथ से चाय का प्याला गिरते-गिरते बचा। बीसीसीआई वालों की बुद्धि पर बहुत ग़ुस्सा आया। लगा कि इससे बढ़िया तो अपना चैपल ही था, कम-से-कम उंगली तो करता रहता था। लेकिन ये जनाब तो उस लायक़ भी नहीं हैं। ख़ैर, फिर लगा कि हो सकता है मैं रवि शास्त्री को कुछ ज़्यादा ही अण्डर एस्टीमेट कर रहा हूँ।
उधर चैपल है कि कोच की क़ुर्सी जाने के बाद भी बयानबाज़ी की आदत है कि जाने का नाम ही नहीं ले रही है। चैपल ने फिर एक बार टीम के कई खिलाड़ियों पर (अगर उन्हें 'खिलाड़ी' कहा जा सहे तो...) कटाक्ष किए हैं और अपने चहेते सुरेश रैना की तारीफ़ की है। मैं कई लोगों से मिलना चाहता हूँ, जैसे - कैमरून डिआज़, ऐश्वर्या राय, सानिया मिर्ज़ा वगैरह वगैरह। इसी सूची में चैपल के 'रैना' का नाम भी है। शक़्ल से आप लोग वैसे ही समझदार लगते हैं, इसलिए बाक़ियों से क्यों मिलना चाहता हूँ यह तो नहीं बताऊँगा। हाँ, रैना से मिलने की ख़ास वजह है। रैना से मिलकर ये जानना चाहता हूँ कि चैपल के वशीकरण के लिए उसने कौन-से तांत्रिक टोटके का इस्तेमाल किया है। एक बार ऐसा तंत्र-मंत्र हाथ लग जाए ताकि अपनी लिस्ट के बाक़ी लोगों पर मैं भी उसे आज़मा कर देख सकूँ। :-)
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4 Comments:
प्रतीक बस एक ही झटका लगा क्या, टीम के बाहर होते ही बीसीसी आइ और पंवार कितना हल्ला मचा रहे थे लेकिन मीटिंग में सारी हवा निकल गयी, इन्हें सारे भारत में शास्त्री ही नजर आया। ये भी हो सकता है कोई और अंतरिम कोच बनने को तैयार ना हो, एक रात की दुल्हन कौन बनना चाहेगा। सुना है चैपल को अभी भी भारतीय टीम से चिपकाने की कवायद जारी है, कुछ कंसलटेंट वगैरह का पिलान है ;)
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Tarun, at 8:12 PM
एक बार एक भाई साहब टोने टोटके लेकर आये तो थे, तब क्या पता था एक दिन इनकी जरुरत पड़ जायेगी. वरना काहे भगाते!! खैर, फिर ढ़ूँढा जायेगा उनको. :)
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Udan Tashtari, at 9:49 PM
और तो और भाई साह्ब, रोबिन सिहं को फ़िल्डिगं कोच बनाया है, और प्रसाद को बोलिगं कोच, समझ में नही आता रोए या हसें?
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Anonymous, at 10:14 PM
मजेदार है भाई, कुछ टोटके हमारी तरफ भी भेज दीजिऐगा। :)
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mahashakti, at 9:11 AM
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