उठो लाल अब आँखें खोलो
उठो लाल अब आँखें खोलो
पानी लायी हूँ, मुँह धोलो
बीती रात कमल-दल फूले
उनके ऊपर भँवरे झूले
चिड़िया चहक उठीं पेड़ों पर
बहने लगी हवा अति सुन्दर
भोर हुई सूरज उग आया
नभ में हुई सुनहरी काया
आसमान में छायी लाली
हवा बही सुख देने वाली
नन्हीं-नन्हीं किरणें आयीं
फूल हँसे कलियाँ मुसकायीं
इतना सुन्दर समय ना खोओ
मेरे प्यारे अब मत सोओ
पानी लायी हूँ, मुँह धोलो
बीती रात कमल-दल फूले
उनके ऊपर भँवरे झूले
चिड़िया चहक उठीं पेड़ों पर
बहने लगी हवा अति सुन्दर
भोर हुई सूरज उग आया
नभ में हुई सुनहरी काया
आसमान में छायी लाली
हवा बही सुख देने वाली
नन्हीं-नन्हीं किरणें आयीं
फूल हँसे कलियाँ मुसकायीं
इतना सुन्दर समय ना खोओ
मेरे प्यारे अब मत सोओ
If you're new here, you may want to subscribe to my RSS feed, or to check similar posts on Hindi Songs and Bollywood Gossips.



8 Comments:
यह कविता सम्भवतः कक्षा तीन में पढ़ा था। यहाँ प्रकाशित करने की कुछ ख़ास वज़ह? अगर आप हम ललाओं को उठाना ही चाहते हैं तो सुबह उठाइये, आप तो रात में ही शुरू हो गये। वाह मियाँ वाह।
By
शैलेश भारतवासी, at 2:37 AM
सहज अभिव्यक्ति है ....
By
अनूप भार्गव, at 5:38 AM
मुझे भी लगा था कि मैने इसे कहीं पढ़ा था। फिर सोचा आपने इसके बारे मे कुछ लिखा नही है। तो लगा कि आपने ही लिखा है। और आकर बधाई देने लगा। पर शैलेश जी की टिप्पणी ने मेरे शक को यकीन मे बदल गया।
बधाई कैन्सिल
अच्छी कविता को पुन: पढ़ाने के लिये धन्यवाद
By
mahashakti, at 8:14 AM
ये कविता पहली बार पढ रहा हूं - काफी अच्छी कविता है
By
SHUAIB, at 11:15 AM
शायद कक्षा दो या तीन में पढी थी, अन्त की कुछ पंक्तिया भूल गया था। आज फिर से पढ कर अच्छा लग रहा है।
By
विशाल सिंह, at 11:57 AM
भाई साहब ये विज्ञापन की वजह से कुछ पढ़ा नहीं जा रहा, टिप्प्णी वाले पेज प आ कर show original post पर क्लिक कर पढ़ना पड़ रहा है। :(
कविता अच्छी लगी।
By
Sagar Chand Nahar, at 12:23 PM
मैंने भी कक्षा तीन में पढ़ी थी। पाँचवा अंतरा संभवत: इस प्रकार होना चाहिए-
आसमान में लाली छाई
ठंडी हवा बही सुखदाई
बचपन याद आ गया।
By
अतुल शर्मा, at 5:29 PM
इस कविता को पढ़कर बचपन याद आ गया क्यूंकि ये कविता हमने तीसरी कक्षा मे पढी थी। उस ज़माने मे सुबह उठना अच्छा माना जाता था पर आज कल तो लोगों का सबेरा ही १० बजे रात मे होता है। वैसे प्रतीक आपको ये कविता कहॉ से याद आयी ?
By
mamta, at 10:03 PM
Post a Comment
<< Home