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Friday, June 22, 2007

क्या “वैदिक गणित” वाक़ई “वैदिक” है?

Vedic Mathematicsपिछले कुछ दिनों से मैं भारतीकृष्णतीर्थ महाराज कृत “वैदिक गणित” नाम की किताब पढ़ रहा हूँ। इसमें दी गई विधियाँ काफ़ी बढ़िया हैं और तेज़ी से गणना करने में बहुत सहायक हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या भारतीकृष्णतीर्थ महाराज की यह गणित वाक़ई वैदिक गणित है। स्वामी जी का कहना है कि यह गणित कुछ सूत्रों पर स्थापित है और ये सूत्र अथर्ववेद संहिता के परिशिष्ट में उन्होनें पाए थे। हालाँकि वे खुद इस परिशिष्ट को जनता के सामने कभी नहीं रख सके। जहाँ तक सूत्रों की बात है, ये सूत्र साफ़ तौर पर वैदिक संस्कृत में नहीं हैं। बानगी देखिए – “यावदूनं तावदूनीकृत्य वर्गं च योजयेत्” और “ऊर्ध्वतिर्यगभ्याम्” आदि। इसके अलावा इन सूत्रों का जिक्र किसी भी अन्य प्राचीन किताब में नहीं है। जान पड़ता है कि गणित की इस पद्धति का विकास खुद भारतीकृष्णतीर्थ महाराज ने किया है।

इसके उलट आजकल जो गणित प्रचलित है, वह पूरी तरह वैदिक है। यानी कि उसका विकास काफ़ी हद तक वैदिक परम्परा में हुआ है। उदाहरण के लिए दशभू पद्धति का उल्लेख वैदिक संहिताओं में मिलता है, पाइथागोरस प्रमेय सहित बहुतेरी दूसरी प्रमेयों को सूत्र ग्रंथों में पढ़ा जा सकता है। मैंने कहीं पढ़ा है कि कैलकुलस का विकास भी भारत में हुआ है, हालाँकि मुझे नहीं मालूम यह किस ग्रंथ में निबद्ध है। तो मेरे ख़्याल से वर्तमान में प्रचलित गणित “वैदिक गणित” अधिक है, बजाय “वैदिक गणित” के नाम से प्रचलित गणित के। हालाँकि इससे स्वामी जी की “वैदिक गणित” का महत्व कम नहीं होता है, क्योंकि यह अपने आप में बेहतरीन है। लेकिन ऐसे में “वैदिक गणित” को “वैदिक” कहना कितना सही है, जबकि इसका मूल वैदिक नहीं जान पड़ता है और यह कुछ दिनों पहले ही स्वामी भारतीकृष्णतीर्थ जी द्वारा विकसित की गई है? इस बारे में आप लोगों की क्या राय है?

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16 Comments:

Blogger Shrish said...

यह वैसी ही बात है जैसे कि स्वामी रामदेव ने कुछ आसन खुद बनाए और कहते उन्हें भी योगासन ही हैं हालांकि वो नए हैं।

इसी तरह उपरोक्त स्वामी जी का गणित होगा तो वैदिक सूत्रों पर आधारित परंतु विकसित उन्होंने खुद किया है, बाकी वैदिक शब्द इसकी महता बनाने के लिए जोड़ दिया गया होगा।

9:12 PM  
Blogger RC Mishra said...

शोध और अनुसंधान की महत्ता सब जगह होती है, स्वामी जी की गणित परिशोधित प्रतीत होती है।

9:38 PM  
Blogger The Vedic Maths Forum India said...

The sources to the Vedic Math Sutras Has been discovered and founded by the Current Shankaracharya of Govardhan Matha.
Please go through the following links for more clarification to the exact link. After going thru the link u wud certainly agree that the sources are correct to be called as Vedic-

the links are--
http://www.vedicmathsindia.org
Go to the History Section where thy mention about the sources of the sutras.

NExt Link is http://vedicmathsindia.blogspot.com
this is just a nice blog on vedic math for ur reference.

Thanks

9:40 PM  
Blogger Pratik said...

@ The Vedic Maths Forum India
आपकी बताई गई वेबसाइट पर कहा गया है कि ये सोलह सूत्र "शुल्व सूत्र" नामक ग्रंथ से लिए गए हैं। मैंने "शुल्व सूत्र" देखा है। इसमें "वैदिक गणित" के सूत्रों का वर्णन कहीं नहीं है। वैसे, साइट बहुत उपयोगी है। बतलाने के लिए धन्यवाद।

11:47 PM  
Anonymous अमित said...

स्वामीजी की पुस्तक में प्रस्तुत सभी सूत्र गणना करने की अनेकानेक विधियां हैं. अब गणनाएं दो अंकों का गुणा करने की हों या किसी द्विघातीय समीकरण के मूल निकालने की. बहुत सी विधियों का विशेष अभ्यास होने पर गणनाएं तीव्र गति से हो भी जाती हैं. ज्यामिति, जो गणित की एक महत्वपूर्ण शाखा है और जिसके समुचित ज्ञान के बिना इतनी बारीकी के साथ हवन कुण्ड बनाना संभव नहीं था/है, भी हमारे वैदिक ज्ञान का हिस्सा है. भारतीय गणित के ऐसे महत्वपूर्ण पक्षों से स्वामीजी की पुस्तक अछूती है. अत: इसे वैदिक समय में प्रचलित गणित का सम्पूर्ण प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता.

एक बात और, इस पुस्तक में इस बात का तो उल्लेख है कि कोई गणना सरल कैसे बनायी जाये, पर उस विधि के काम करने का मूल कारण क्या है उसकी व्याख्या नहीं की गई.

प्रतीक भाई, आप सही कह रहे हैं. गणित के क्षेत्र में भारत का सदैव विशिष्ट योगदान रहा है. पाई की शुद्धतम गणना का प्रयास(अनेक विद्वानों द्वारा), त्रिकोणमिति के अनेक अनुपात (ज्या = Sin इत्यादि), हेमचन्द्र श्रेणी (जिसको आजकल Fibonacci Series कहा जाने लगा है),
अनन्त पदों की बहुत सी श्रेणियां व उनका योगफल - इन सबने वर्तमान कैलकुलस की नींव रखी और ऐसे बहुत सी बातें भारतीय विद्वानों ने ही (विशेषकर गत २००० वर्षों में)खोजी हैं. बीजगणित में भास्कराचार्य की मूल सोच ने वर्तमान Theory of Quadratic Forms का मार्ग प्रशस्त किया. इनको मैं वैदिक गणित नहीं कहूंगा (क्योंकि इनका वेदों से कुछ लेना-देना नहीं), पर हां इन सबका विकास भारतीयों के हाथ ही हुआ, और ये सब सिद्धान्त गणना मात्र से परे बहुत गहरी सोच पर आधारित थे. और गणित गणना मात्र नहीं है.

11:54 PM  
Blogger अभय तिवारी said...

आप लोग ऐसी बहस कर रहे हैं यही देख कर मेरा जी जुड़ा रहा है.. मेरा और गणित का रिश्ता बहुत पहले टूट चुका है.. इस टिप्प्णी को मेरा उत्साहवर्धन समझें..

7:14 AM  
Blogger mahashakti said...

वैदिक गणित पर शोध करना अ‍च्‍छी बात है। एक खास बात पढ़ने के बाद कुछ सूत्र मुझे भी बताइयेगा। :)

7:22 AM  
Blogger संजय बेंगाणी said...

'वैदिक गणित' यानी कुछ मामलो में उपयोगी 'शोर्टकटस'.

11:09 AM  
Blogger ravish said...

मुझे गणित से डर लगता है। कैलकुलस हो या एलजेबरा..सब लगते चितकबरा। वैदिक गणित पर अच्छी जानकारी रही। और जानकारी दें तो अच्छा

4:16 PM  
Blogger ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

1. आपका बांयी ओर की गूगल एडसेंस वर्टिकल पट्टी मेरे 800x600 के स्क्रीन पर आपके लिखे को दबा रही है. इस पट्टी का स्थान कृपया बदल दें.
2. वैदिक शब्द पर शायद ज्यादा झगड़े की जरूरत न हो - अगर वे सूत्र काम के हों तो. अब तो कम्प्यूटर-कैल्कुलेटर के जमाने में इनकी एण्टीक वैल्यू - यदि हो तो - ही प्रतीत होती है.

4:40 PM  
Blogger DR PRABHAT TANDON said...

आपका बांयी ओर की गूगल एडसेंस वर्टिकल पट्टी मेरे 800x600 के स्क्रीन पर आपके लिखे को दबा रही है. इस पट्टी का स्थान कृपया बदल दें.
अगर प्रतीक आपको याद हो तो मैने भी आपको कई बार इस ओर ध्यान दिलाया था . कृपया १५" मानीटर वालों पर रहम करें. :)

२) रही बात गणित की , बडी मुशिकल से पिडं छूटा था फ़िर क्यूं याद दिला दिया :)

6:05 PM  
Blogger Pratik said...

@ ज्ञानदत्त पाण्डेजी और डॉ प्रभात टण्डनजी,
दाईं तरफ़ वाले विज्ञापन के ऊपर एक विकल्प है - Remove Ad. आप उसे इस्तेमाल कर उस विज्ञापन पट्टी को हटा सकते हैं। उम्मीद है आप उस विकल्प का प्रयोग कर मेरे चिट्ठे को पढ़ना जारे रखेंगे।

8:54 PM  
Blogger The Vedic Maths Forum India said...

@pratik
I just came across your blog again and read the comments you posted to my post.

My certain clarifications:-

1) Some of the sources of the Vedic Sutra is from Srimad Bhagawatam. This has been confirmed by the current Shankaracharya of Govardhan Matha and proven. This has been mentioned on my website. giving the exact reference to the Sisyate Sutra.
2) The complete Sulba Sutras are too complex for you and me to Understand. There are deep layered meaning words and they are in the code form. I aware of a number of books on Sulba Sutras. They all touch it but do not go very deeply. Also most of the sutras are hidden and have various meanings like the Sisyate Sesh samjnah sutra which has mathematical meaning but is in midst of what is supposedly a religious text.
3) I am currently going through the diaries of Bharti Krishna Tirthaji Maharaja pages of which will soon be published on my blog which confirm that Vedic Math is actually Vedic.

I wud love to be involved on this conversation and throw more insights. When you respond please throw a email to me at gtekriwal@gmail.com or comment on my blog http://vedicmathsindia.blogspot.com

Wishes
Gaurav

11:43 PM  
Blogger The Vedic Maths Forum India said...

@amit

1) BKT has mentioned Algebraic Proofs of his sutras in the book. ex for division, multiplication, square roots,cube roots and other topics.

Each and every proof has been provided.

Let me knw what proof u need and I shall provide u the page nos. of it.

Thanks
Gaurav
www.vedicmathsindia.org

11:46 PM  
Blogger The Vedic Maths Forum India said...

HI!
On my Vedic Maths Blog I've posted the diaries of Tirthaji which have the sources mentioned. SO there is no doubt about the sources of these texts.

Also check out my website on Vedic Maths where the detailed sources from Bhagwat Purana are mentioned.

Thanks
Gaurav

3:59 AM  
Blogger rk said...

Hi.. Thanks for this informative article. I really liked it. I also

came across this similar site with nice articles and videos on vedic

prinicples - http://www.vich

11:59 AM  

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