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Sunday, June 24, 2007

यूनिकोड और वैदिक संस्कृत

हाल में यूनेस्को ने ऋग्वेद संहिता की १८०० से १५०० ईसा पूर्व की ३० प्राचीन पाण्डुलिपियों को सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल किया है। यह ख़बर आप विस्तार से यहाँ पर पढ़ सकते हैं। मेरे ख़्याल ये प्राचीन पाण्डुलिपियाँ ब्राह्मी लिपि में हैं। समय के साथ ब्राह्मी लिपि ही देवनागरी में तब्दील हो गई। वैदिक संस्कृत में ऐसे कई अक्षर और ध्वनियाँ हैं, जो आम तौर पर देवनागरी वर्णमाला में देखने में नहीं आती हैं। उदाहरण के लिए एक वैदिक ऋचा मूल रूप में देखिए –

ओ३म् शन्नो॑ मि॒त्रः शं वरु॑णः॒ शन्नो॑ भवत्वर्य्य॒मा।
शन्न॒ऽइन्द्रो॒ बृह॒स्पतिः॒ शन्नो॒ विष्णु॑रुरुक्र॒मः॥

यहाँ अक्षरों के ऊपर-नीचे बनाई गई रेखाओं (और इसी तरह अप्रचलित बहुत-से दूसरे अक्षरों) का प्रयोग वैदिक संस्कृत में आम है। मैं यह जानना चाहता हूँ कि वैदिक संस्कृत से जुड़े ऐसे सभी अक्षरों और ध्वनिसूचक चिह्नों को कैसे टाइप किया जा सकता है? इसके लिए क्या कोई औज़ार नेट पर उपलब्ध है? या फिर इन्हें टाइप करने का कोई और तरीक़ा है? यह ऋचा मैंने इस साइट की मदद से टाइप की है। यहाँ केवल कुछ ध्वनिसूचक चिह्न ही दिए गए हैं।


यह भी पढ़िए:

१. क्या “वैदिक गणित” वाक़ई “वैदिक” है?
२. रोमन लिपि के साथ हिन्दी का भविष्य
३. हिन्दी में देवनागरी का ग़लत प्रयोग

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4 Comments:

Blogger RC Mishra said...

आपकी भाषा और शैली दोनो बहुत अच्छी है। इस प्रविष्टि मे मुझे तब्दील का प्रयोग अपरिहार्य तो नही समझ आता।

12:14 PM  
Blogger Pratik said...

हाँ मिश्रजी, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। "तब्दील" शेष प्रविष्टि की भाषा के साथ नहीं जा रहा है।

8:39 PM  
Blogger Shrish said...

प्रतीक जी जहाँ तक मैं जानता हूँ, इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड में देवनागरी की संपूर्ण वर्णमाला वैदिक संस्कृत समेत शामिल है।

ट्रांसलिट्रेशन औजारों में सर्वाधिक देवनागरी के वर्ण (वैदिक संस्कृत सहित) मेरे विचार से बरहा में हैं।

फिर भी यह संभव है कि कूछ ध्वनियों हेतु इन कीबोर्डों में कोई व्यवस्था न हो।

8:00 AM  
Blogger हरिराम said...

प्रतीक जी और पाण्डे जी, इस बारे में आपकी जानकारी हेतु एक तकनीकी-आलेख वैदिक संस्कृत स्वर चिह्नों का यूनिकोड मानकीकरण पेश है। आशा है आप भी इस महान कार्य में सहयोग देंगे।

5:45 PM  

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