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Tuesday, August 14, 2007

भारतीय विद्वानों ने की न्यूटन से पहले गणित की महत्वपूर्ण खोज

गणित के महत्वपूर्ण सिद्धांत की खोज, जिसका श्रेय सर आइज़ेक न्यूटन को दिया जाता है, दरअसल भारतीय विद्वानों की खोज थी। न्यूटन से क़रीब ढाई सौ साल पहले केरल के गणितज्ञों ने कैलकुलस के मूलभूत सिद्धांतों में से एक ‘अनंत श्रेणी’ (Infinite Series) की खोज की थी। इस तथ्य का खुलासा हाल में लन्दन में किए गए एक शोध से हुआ है। मेनचेस्टर विश्वविद्यालय के डॉ. जॉर्ज जोसेफ़ के मुताबिक़ सन् १३५० ई. के आस-पास गणित के ‘केरल स्कूल’ में पाई शृंखला की भी खोज की थी और पाई का मान १७ अंकों तक सही-सही निकाला था। यह भारतीय खोज केरल की जेसुइट मिशनरियों के ज़रिए इंग्लैंड पहुँची व उन्हीं से इसकी जानकारी न्यूटन को भी हुई। बाद में इसकी खोज का श्रेय न्यूटन को ही दिया गया। यह ख़बर विस्तार से यहाँ पढ़ें

दुर्भाग्य की बात यह नहीं है कि इसका श्रेय किसी ग़ैरहिन्दुस्तानी को मिला, बल्कि यह है कि ये बात भी लन्दन में शोध के दौरान सामने आई। क्या हम भारतीय इतने जड़ हो चुके हैं कि अपनी उपलब्धियों को भी इस तरह भुला देते हैं, मानो कोई भारी भूल कर दी हो। फिर अपने इतिहास से इतने अनभिज्ञ रहने की कोशिश करते हैं, जैसे हमारे इतिहास में कुछ अच्छा हो ही नहीं सकता। अजंता-एलोरा, एलीफ़ेण्टा, सिन्धुघाटी की सभ्यता आदि ज़्यादातर खोजें पश्चिमीं विद्वानों द्वारा की गई हैं और दुःख है कि शायद ही भारतीयों ने अपनी थाती को खंगालने की कभी कोशिश तक की हो। क्या यह मानसिकता कभी बदल भी पाएगी?

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10 Comments:

Blogger अभय तिवारी said...

तुम्हारी पीढ़ी बदलेगी.. तुम्हे देख कर भरोसा होता है..

12:37 PM  
Blogger Nasiruddin said...

सिर्फ यह कहने से काम नहीं चलने वाला कि अतीत में सब बड़ा अच्‍छा था और हिन्‍दुस्‍तान में तो सब था। काम करके बता पड़ेगा। साबित करना पड़ेगा। इसके लिए परिश्रम और शोध की दृष्टि चाहिए। अभय जी ने ठीक कहा, तुम्‍हारे जैसे लोग हालात बदल सकते हैं... बदलेंगे।

1:19 PM  
Blogger vishesh said...

good task

3:28 PM  
Blogger अनुनाद सिंह said...

इसी लिये कहा जाता है कि इतिहास पर बहुत भरोसा मत करो। इतिहास वही लिखता है जो जीतता है या जो शाशन में होता है। हम लोगों को जो पढ़ाया गया है कि Bरिटिश औद्योगिक क्रान्ति के मूल में आर्कराइट के जिस मशीन की बात की जाती है, वह किसी और गुमनाम व्यक्ति का कार्य था, जिसे आर्कराइट ने 'चुरा' लिया ।

3:54 PM  
Anonymous नीरज दीवान said...

आत्मगौरव होता है। जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने दुनिया को तब गिनती आई.. वाह।
जानकारी के लिए धन्यवाद।

7:06 PM  
Blogger Udan Tashtari said...

आभार जानकारी के लिये.

8:12 PM  
Blogger bhuvnesh sharma said...

आपकी दोनों ताज़ातरीन पोस्ट पढ़कर अच्छा लगा.
इस प्रकार के विषयों पर लिखना जारी रखें......

8:26 PM  
Blogger हरिराम said...

आज भी अनेक भारतीय अपने आविष्कार विदेशी वैज्ञानिकों को बेच दे रहे हैं, सिर्फ पैसों के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा के कारणों से, अपने ही लोगों की ईर्ष्याजनित हिँसा से बचने के लिए भी...

4:33 PM  
Blogger Shrish said...

सिर्फ यही नहीं बहुत सी खोजें भारतीय सदियों पहले कर चुके हैं जिन पर यूरोपीय ठप्पा लगा है। उदाहरण के लिए गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत की खोज का श्रेय भी न्यूटन को दिया जाता है जबकि इसका वर्णन हजारों साल पुराने भारतीय ग्रंथों में मिलता है।

4:14 PM  
Anonymous Anonymous said...

nice post. u said the right thing buddy. India has been contributing in all the different fields of mathematics and science such as calculus, algebra, trigonometry etc. but the sad part is that we are not aware of our ancient wisdom. keep writing good hindi blog.

2:41 PM  

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