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Hindi Blog on Movies, Songs n Music

Wednesday, March 12, 2008

English Hindi Dictionary Online

Are you one of those people, who want to write in Hindi but the right words don’t strike you any more??? And English words come rushing to your mind instead. In that case, you need the help of a good online dictionary which will enable you to write efficiently in your mother tongue again. Here’s a list of some good free online English Hindi dictionaries. Have a look:

1. Shabdkosh
2. Universal Word Hindi Lexicon
3. Word Anywhere
4. Aksharmala Shabdakosh
5. Dicts Dictionary
6. Dictionary of Urdu, Classical Hindi & English

Some of these dictionaries can translate the words both ways i.e. English to Hindi and Hindi to English. If you are fond of using any specific online dictionary yourself, please don’t hesitate to mention that in comment section.

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Tuesday, March 11, 2008

Hindi News Channels Online

You want to keep yourself updated with what is happening in India through Hindi news channels, but you don’t know where you can get to see them online. I’ve found some free online resources for those who are fond of Hindi samachar. Here are some of the good Hindi news channels streaming online on the internet:
IBN 7
Aaj Tak
CNBC Awaz
Star News
DD News

ऑनलाइन हिन्दी समाचार
क्या आप हिन्दी ख़बरिया चैनलों के ज़रिए देश के हालात पर नज़र रखना चाहते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि आप इन चैनलों को ऑनलाइन कहाँ देख सकते हैं? मुझे कुछ मुफ़्त ऑनलाइन स्रोत मिले हैं, जहाँ आप हिन्दी ख़बरों का लुत्फ़ ले सकते हैं। ये रही इंटरनेट पर स्ट्रीम हो रही कुछ हिन्दी न्यूज चैनलों की सूची :
आईबीएन 7
आजतक
सीएनबीसी आवाज़
स्टार न्यूज़
डीडी न्यूज़

Tags:

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Tuesday, February 12, 2008

राज ठाकरे और राजनीति का विकास

- एक -

पहले राजनेता नहीं थे। शुरूआती होमोसेपियंस ने दुनिया में जहाँ चाहा, वहाँ अपना तम्बू गाड़ा और वहीं रहने लगे।
फिर धीरे-धीरे शुरुआती राजनेता आए और देश बने। एक देश से दूसरे देश में जाना दूभर हो गया। किसी गढ़रिए ने बॉर्डर क्रॉस किया तो पुलिस पकड़ने लगी।
फिर आए राज ठाकरे टाइप लोग... एक राज्य से दूसरे राज्य में आना-जाना मुश्किल हो गया। गए तो ठोंक-बजा दिए गए।
अब लगता है कुछ दिनों में शहरों की दिक़्क़त आएगी... आगरा से मथुरा गए तो पिटाई हो जाएगी।
फिर राजनीति और आगे बढ़ेगी... प्रांतवाद के बाद मुहल्लावाद भी आएगा। ये सोचकर कॉलेज के मेरे नॉट-सो-गुड-फ़्रेण्ड्स बहुत ख़ुश हैं। अगर मैं छिपीटोले गया, तो मेरा घण्टा बजाने का मौक़ा मिलेगा। मैं भी ख़ुश हूँ... मुझे भी मौक़ा मिलेगा।
इसके बाद गलीवाद भी आएगा... सामने वाली गली में गए ग़लती से तो भरपूर प्रसाद देकर वापस भेजा जाएगा।
फिर शायद राजनीति और विकसित होगी... चूँकि पड़ोसी मनसे का कार्यकर्ता होगा, तो उसके आंगन में गेंद उठाने जाना ख़तरे से खाली नहीं होगा।
आपको भले ये ख़याली पुलाव लगे, लेकिन मुझे राजनीति और राजनेताओं पर पूरा भरोसा है... भविष्य में घर के एक कमरे से दूसरे कमरे में जाना भी ख़ामख़्वाह का ख़तरा मोल लेना होगा।
इसके आगे समझ नहीं आ रहा कि राजनीति कैसे विकसित होगी... आप भी सोचिए और बतलाइए।

- दो -

राज ठाकरे का मराठियों को भूमिपुत्र कहना ग़लत है। भूमिपुत्र तो यूपी-बिहार वाले भी हुए परिभाषा के हिसाब से, इर्रेस्पेक्टिव ऑफ़ कोई कहीं भी रहे। मेरे ख़्याल से राज्य-पुत्र सरीखा कुछ होना चाहिए।
फिर राजनीति के विकास के साथ –
शहर/क़स्बा/गांव पुत्र
मोहल्ला-पुत्र
गली-पुत्र
मकान-पुत्र
कमरा-पुत्र
आगे आप सोचिए।

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Sunday, January 13, 2008

Hindi Music Lyrics

Nowadays we see that Bollywood songs have more emphasis on music and that’s why many a times even beautiful quality lyrics get lost in clamor music. Also clear understanding of the words written by lyricists like Gulzar and Javed Akhtar is essential. And without which one cannot appreciate real soul of the song. So here are few online free resources I found quite good to find lyrics of various Hindi songs:

1. www.bollywoodlyrics.com
2. www.bollywoodblitz.com/lyrics
3. smriti.com/hindi-songs

आजकल देखने में आ रहा है कि बॉलीवुड गीतों में बोल की बजाय संगीत पर ज़्यादा ज़ोर रहता है। यही वजह है कि कई बार गाने के बेहतरीन बोल भी तेज़ संगीत में दबकर रह जाते हैं। साथ ही गुलज़ार और जावेद अख़्तर जैसे उम्दा गीतकारों के लिखे बोलों को पूरी तरह समझे बिना गीत की गहराई में नहीं उतरा जा सकता है। ये कुछ मुफ़्त ऑनलाइन स्रोत हैं, जहाँ आप हिन्दी गानों के बोल पढ़ सकते हैं:

1. www.bollywoodlyrics.com
2. www.bollywoodblitz.com/lyrics
3. smriti.com/hindi-songs

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Saturday, January 12, 2008

WATCH HINDI TV STREAMING ONLINE

Friends! Here’s good news for all of desi TV lovers. I’ve been to US and can understand that American TV shows are very draggy for those who have Indian taste for entertainment. But now you can enjoy most of Hindi television channels like star plus, star one, sony, zee etc. online. Even you can get to watch almost all the Hindi news channels like aaj tak, star news, zee news, india tv and NDTV etc. too. This is the list of absolutely free resources for you:

1. www.techsatishdesi.com
2. www.idesitv.com

Related Posts:
1. Live Indian Streaming TV channels


देखिए हिन्दी टीवी स्ट्रीमिंग ऑनलाइन

दोस्तो! मेरे पास हिन्दी टीवी प्रेमियों के लिए एक ख़ास ख़बर है। मैं अमेरिका जा चुका हूँ और जानता हूँ कि अमरीकी टीवी कार्यक्रम हम हिन्दुस्तानियों के हिसाब से कितने उबाऊ होते हैं। लेकिन अब आप ज़्यादातर हिन्दी टीवी चैनल जैसे कि स्टार प्लस, स्टार वन, सोनी और ज़ी टीवी वगैरह का लुत्फ़ इंटरनेट पर उठा सकते हैं। यहाँ तक कि आप आजतक, स्टार न्यूज़, ज़ी न्यूज़, इंडिया टीवी और एनडीटीवी जैसे अधिकांश हिन्दी ख़बरिया चैनल भी ऑनलाइन देख सकते हैं। तो फिर देर किस बात की, तुरंत देखिए:

1. www.techsatishdesi.com
2. www.idesitv.com

सम्बन्धित लेख :
1. लाइव स्ट्रीमिंग भारतीय टीवी चैनल

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Friday, January 11, 2008

Happy Birthday to You in Hindi

Do you want to wish your near & dear one on his/her birthday in true bollywood style. Then here’s the song sung by legendry Mohammad Rafi in 1967 blockbuster Farz that you can play now:



To read the lyric of this popular Hindi birthday song, visit this webpage.

क्या आप अपने किसी प्रिय को ख़ालिस बॉलीवुड शैली में जन्मदिन की मुबारकबाद देना चाहते हैं। तो फिर ऊपर दिया हुआ गाने का वीडियो प्ले करें। इस मशहूर हिन्दी जन्मदिन गाने के बोल पढ़ने के लिए यह वेब-पन्ना देखिए।

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Thursday, January 03, 2008

Hindi Films in 2008

Year 2007 proved to be a great experience for viewers. Now let's have a look at upcoming movies of 2008. Ashutosh Govarikar's "Jodha Akbar" is on the top in this list. Hritik Roshan and Aishwarya Rai starer "Jodha Akbar" is being awaited by movie bucks impatiently for quite a long time.

Ajay Devgan is going to hullabaloo on box office through his two movies this year, "Halla Bol" and "Sunday". Also, he'll be seen in entirely different role behind the camera in "You, Me & Hum" as a director. Stars like Akshay Kumar, Saif Ali Khan, Kareena Kapur and Anil Kapur are going to shine under the banner of Yashraj in probably its only film "Tashan" this year. King of Bollywood Shah Rukh Khan will be seen in "Bhootnath" in a guest appearance.

Our Sallu bhai is in mood to take the box office with storm this year. Salman Khan's fans will see him in "God Tussi Great Ho" with hot Priyanka Chopra and superstar of millennium Amitabh Bachchan. He's acting in Subhash Ghai's "Yuvaraj" and Boni Kapoor's "Wanted: Dead or Alive" too. Amir Khan's "Ghajni" will also be shown this year. Starlet Jiya Khan is enacting in this movie with Amir. Abhishek Bachchan's long awaited "Drona", "Sarkar Raj" and "Dilli 6" will buzz box office this year. Yet another big movie of year 2008 is "Singh is King" staring popular pair of Akshay Kumar and Katerina Kaif. Rakesh Roshan's "Crazy 4" and "Heraphir 4" will also be shown this year.

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1. Free Download Bollywood Hindi Movies (See comments too)
2. Online Bollywood Movies for Free
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2008 की हिन्दी फ़िल्में

साल 2007 हिन्दी फ़िल्मों के शौक़ीनों के लिए काफ़ी अच्छा रहा है। आइए सरसरी नज़र डालते हैं उन फ़िल्मों पर, जो नए साल यानी कि 2008 में प्रदर्शित होने वाली हैं। इस सूची में सबसे ऊपर नाम आता है आशुतोष गोवारीकर की "जोधा अकबर" का। ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय जैसे बड़े सितारों से सजी इस फ़िल्म का सभी को बेसब्री से इंतज़ार है।

2008 में अजय देवगन बॉक्स ऑफ़िस पर हल्ला बोलने वाले हैं अपनी दो फ़िल्मों "हल्ला बोल" और "संडे" के ज़रिए। साथ ही नए साल में अजय एक नए किरदार में भी नज़र आएंगे - निर्देशक के रूप में "यू मी और हम" में। सैफ़ अली ख़ान, अक्षय कुमार, करीना कपूर और अनिल कपूर अपना टशन दिखाएंगे यशराज की इस साल आने वाली इकलौती फ़िल्म "टशन" में। हरदिल-अज़ीज़ शाहरुख़ ख़ान बतौर मेहमान कलाकार दिखेंगे "भूतनाथ" में।

सल्लू भाई 2008 में धड़ाधड़ फ़िल्में देने के मूड में हैं। पहले तो सलमान ख़ान को दर्शक "गॉड तुस्सी ग्रेट हो" में अमिताभ बच्चन और प्रियंका चौपड़ा के साथ देखेंगे। उसके बाद वे सुभाष घई की "युवराज" और बोनी कपूर की "वाण्टेड: डेड ऑर अलाइव" में भी अपना जलवा बिखेरते नज़र आएंगे। आमिर ख़ान की फ़िल्म "गजनी" भी 2008 में प्रदर्शित हो सकती है, जिसमें उनके साथ नवोदित तारिका जिया ख़ान होंगी। अभिषेक बच्चन रामू की "सरकार राज" के अलावा "द्रोण" और "दिल्ली 6" में भी दिखाई देंगे। 2008 की एक और बड़ी फ़िल्म "सिंह इज़ किंग" है, जिसमें अक्षय कुमार और केटरीन कैफ़ की जोड़ी फिर दोहराई गई है। इन फ़िल्मों के अतिरिक्त "हेराफेरी 4" और राकेश रोशन की " क्रेज़ी 4" भी बड़े पर्दे पर धमाल मचा सकती हैं।

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Tuesday, December 25, 2007

Free Hindi Songs MP3 Download

If you are an ardent fan of bollywood music and hindi songs, you are at the right place. I’m gonna tell you about some excellent free resources, where you can download all your favorite songs from. So get ready to face the torrent of great Hindi music:

1. http://www.songs.pk/
2. http://www.cooltoad.com/
3. http://www.bollymp3songs.com/
4. http://www.holyplanet.com/

If you also know about any good website where Hindi songs can be downloaded from, please comment and let me know.

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1. Free Download Bollywood Hindi Pictures (Do read the comments)
2. Download Hindi Songs & Music for Free
3. Online Bollywood Hindi Movies for Free


मुफ़्त डाउनलोड करें हिन्दी एमपी३ गाने

अगर आप बॉलीवुड संगीत और हिन्दी गानों के प्रशंसक हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। मैं आपको बताने वाला हूँ कई ऐसी मुफ़्त वेबसाइट्स के बारे में, जहाँ से आप अपने पसन्दीदा हिन्दी गाने डाउनलोड कर सकते हैं। तो तैयार हो जाएँ, आ रहा है ज़बरदस्त बॉलीवुड संगीत का तूफ़ान:

१. http://www.songs.pk/
२. http://www.cooltoad.com/
३. http://www.bollymp3songs.com/
४. http://www.holyplanet.com/

अगर आपको भी कुछ ऑनलाइन ठिकाने मालूम हों जहाँ से मुफ़्त में हिन्दी गाने डाउनलोड किए जा सकते हैं, तो कृपया ज़रूर बताएँ।

सम्बन्धित आलेख :
१. मुफ़्त डाउनलोड करें ऑनलाइन बॉलीवुड हिन्दी फिल्में (इस पोस्ट की टिप्पणियाँ ज़रूर देखिए)
२. पुराना बॉलीवुड गीत-संगीत
३. देखिए इंटरनेट पर हिन्दी फ़िल्में

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Sunday, December 16, 2007

Online Bollywood Hindi Movies for Free

There are several website available online for Hindi movie buffs. Most of the people, though, don’t know about these free resources. Many of these sites facilitate the user to download and see Hindi films on their computers. You can watch even most of the bollywood blockbusters online. Here is the great treasure of bollywood hindi movies for you absolutely free:

1. bharatmovies.com
2. 123onlinemovies.com
3. bollyclips.com

If you also know about any good website where Hindi films can be downloaded from, please comment and let me know.

Related posts:
1. Free Download Bollywood Hindi Pictures (Do read the comments)
2. Download Hindi Songs & Music for Free


देखिए इंटरनेट पर हिन्दी फ़िल्में

इंटरनेट पर हिन्दी फ़िल्मों के शौक़ीनों के लिए कई सारी बढ़िया वेबसाइट्स हैं। हालाँकि ज़्यादातर लोगों को ऐसी मुफ़्त की जुगाड़ों के बारे में जानकारी नहीं होती है। इनमें कई वेबसाइट्स से आप पिक्चर डाउनलोड कर सकते हैं। साथ ही कई वेबसाइट्स ऑनलाइन फ़िल्में देखने की सुविधा भी मुहैया कराती हैं। यह लीजिए बॉलीवुड की फ़िल्मों का मनोरंजन से भरपूर ऑनलाइन ख़ज़ाना -

१. bharatmovies.com
२. 123onlinemovies.com
३. bollyclips.com

अगर आपको भी कुछ ऑनलाइन ठिकाने मालूम हों जहाँ से मुफ़्त में हिन्दी फ़िल्म्स डाउनलोड की जा सकती हैं, तो कृपया ज़रूर बताएँ।

सम्बन्धित आलेख :
१. मुफ़्त डाउनलोड करें ऑनलाइन बॉलीवुड हिन्दी फिल्में (इस पोस्ट की टिप्पणियाँ ज़रूर देखिए)
२. पुराना बॉलीवुड गीत-संगीत

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Wednesday, November 07, 2007

प्रेम और समाधि पर भारी रसायन विज्ञान

Love, supesrconsciousness & Chemistryआज सुबह नेशनल जियोग्राफ़िक चैनल पर एक कार्यक्रम आ रहा था – नेकिड साइंस। इसमें मानवीय प्रेम का वैज्ञानिक तौर पर विश्लेषण किया गया था। विश्लेषण से पता चला कि प्रेम कोई हाईफ़ाई फ़ण्डा नहीं है, बल्कि महज़ दिमाग़ में होने वाला केमिकल लोचा है। यानी कि परीक्षणों से पता चला कि जब कोई इंसान प्रेम में होता है, तो उसके दिमाग़ के एक ख़ास हिस्से में कुछ रासायनिक क्रियाएँ होती हैं। ये रासायनिक क्रिया काफ़ी कुछ वैसी ही होती है, जैसी कोकीन खाने से मस्तिष्क में क्रिया होती हैं और दोनों के लक्षण समान होते हैं। लो कल्लो बात! विज्ञान ने तो दो मिनट में प्रेम की ऐसी-तैसी कर दी। कवियों के हज़ारों साल के किए-धरे पर पानी फेर दिया।

लेकिन बस इतना ही होता तो ठीक था। दोपहर में निठल्ली सर्फ़िंग के दौरान एक वेबसाइट देखी। जिनकी यह वेबसाइट है, उन महाशय का कहना है कि समाधि-वमाधि कोई परादैवीय घटना नहीं है। ध्यान करने से दिमाग़ में रासायनिक परिवर्तन होने लगते हैं। जिन लोगों की खोपड़ी में ये रासायनिक परिवर्तन ज़्यादा हो जाते हैं, वे ऐनलाइटेण्ड कहलाते हैं। उन्हें कुछ अजीब तरह की अनुभूति होने लगती है। वैसी अनुभूति टेम्परेरी तौर पर एलएसडी नामक ड्रग लेकर भी पायी जा सकती है। साथ ही उन महाशय का यह भी कहना है कि हिन्दुस्तानी खोपड़ी की संरचना इस कैमिकल लोचे के लिए ज़्यादा अनुकूल है। इसीलिए हिन्दुस्तानी ख़ासे आराम से एनलाइटेंड हो जाते हैं। वहीं पश्चिमी लोग ज़िन्दगी भर भले ध्यान करते रहें, उनकी खोपड़ी की डिज़ाइन उनका साथ नहीं देती है।

अब क्या कहें? रसायन विज्ञान की जय हो। स्कूल में फ़िज़िकल कैमिस्ट्री तो ठीक लगती थी, लेकिन ऑर्गेनिक-इनॉर्गेनिक झिलाय नहीं झिलती थीं। पर हमें तब क्या मालूम था कि ये प्यार-व्यार, समाधि-वमाधि रसायन विज्ञान की एक कला के बराबर भी नहीं है। वरना तभी मन लगाकर पढ़ाई करते और परखनली से अपने सिर में कुछ अच्छे-अच्छे रसायन उढ़ेल लेते।

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Tuesday, September 11, 2007

“दस दिनों में बनें परफ़ेक्ट दंगाई”

चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

अभी कुछ दिनों पहले आगरा में दंगा-फ़साद हुआ। सम्वाददाता ने पूरे दंगे को ग़ौर से देखा और अब आपके सामने पेश है दंगे का आँखों देखा हाल –

Riots in Agra, the city of Taj Mahalइस दंगे में हमेशा की तरह कुछ लोग मारे भी गए। मारे गए लोग काफ़ी नौसीखिए थे और उन्हें दंगों का कोई ख़ास अनुभव नहीं था; तभी दंगे की इस पावन वेला में, जो हर कुछ सालों में एक बार आती है, औरों को टपकाने की बजाय ख़ुद ही टपक गए। हिन्दुस्तान में इत्ते दंगे होते हैं कि कई लोगों ने तो अब इसे अपना फ़ुल-टाइम धन्धा ही बना लिया है। गली-मुहल्ले में दंगे करने के क्रैश कोर्स चलने लगे हैं, जगह-जगह बोर्ड लगे हैं – “एक सप्ताह में दंगा करना सीखें”, “दस दिनों में बनें परफ़ेक्ट दंगाई”, “क्या आपके दोस्त पक्के दंगाई हैं और आप आगज़नी, पथराव, नारेबाज़ी में हिचकिचाते हैं। डरिए मत... अब आ गया है ‘दस दिनों में बनें दंगाई’ क्रैश कोर्स” वगैरह वगैरह। मैंने, यानी संवाददाता ने एक इंस्टीट्यूट के मालिक का इंटरव्यू भी किया। पूछा कि आपका लक्ष्य क्या है? वह बोला – “हम घर-घर दंगाई तैयार करना चाहते हैं... छोटा दंगाई, मोटा दंगाई, बूढ़ा दंगाई, बच्चा दंगाई... सपना फ़सादी भारत का।”

“लगे रहो मुन्ना भाई” ने हिन्दुस्तानी मानस पर कितना गहरा प्रभाव डाला है, यह दंगों के दौरान पता लगा। जितने भी दंगाई मिले, सब-के-सब गांधीवादी। गांधीजी की तरह हर चीज़, हर मौक़े का पूरा इस्तेमाल करने में यक़ीन रखते हैं। जैसे गांधीजी आए हुए शोक-पत्र को भी फाड़ कर नहीं फेंकते थे, दूसरी कोरी तरफ़ ख़त लिखकर पोस्टकार्ड की तरह उसका प्रयोग करते थे... यह आदर्श हम लोगों के दिलो-दिमाग़ में समा गया है। इसलिए लोगों ने ट्रकों, बसों, कारों, दुकानों, कारख़ानों और गोदामों में आग लगा दी और शब-ए-बारात की रात को लगे हाथ दीवाली मनाने का सुख भी लूट लिया। इसे कहते हैं एक तीर से दो शिकार।

इस गड़बड़झाले में सम्वाददाता ने सोचा कि अल्लाह की ख़बर रखने का प्रेरोगेटिव केवल शुएब भाई को तो है नहीं, सो उसने भी इस मामले में अल्लाह की राय जाननी चाही और उसका साक्षात्कार लिया। पूछा, आपकी क्या राय है? अल्लाह ने जवाब दिया, “शब-ए-बारात की रात को, जब मैं सातवें आसमान से उतरकर पहले आसमान पर आया, तो कम दूरी से देखने पर बिल्कुल साफ़-साफ़ दिखाई दिया कि मेरे ये सो-कॉल्ड बन्दे कितने बेवकूफ़ हैं। इन लोगों की वजह से कई लोगों ने भी मुझपर आरोप लगाया कि मैं नीचे उतरकर आया, इसी वजह से यह सारा फ़साद हुआ। आइ एम वेरी सेड।” अल्लाह को ज़्यादा सेंटी होते देख सम्वाददाता सहानुभूति जताकर निकल लिया।

ख़ैर, जैसा कि पड़ोसन में बिन्दु के पिताजी ने कहा है – “जब-जब जो-जो होना है, तब-तब सो-सो होता है।” तो जो होना था, सो हो गया। लेकिन रिपोर्टर ने निष्कर्ष निकाल लिया है कि ग़लती किसकी है। दंगाई तो बेचारे भोले-भाले लोग हैं, वो तो ये सब करने के लिए मजबूर थे। उन्हें क्या दोष देना! साथ ही प्रशासन की भी कोई ग़लती नहीं है। जो गड़बड़ होने से पहले काम शुरू करे, वह प्रशासन कैसा? प्रशासन का काम ही होता है दंगे के बाद उसे काबू करने की कोशिश करना। भले ख़ुदा खुद को कितना ही निर्दोष बताए, दरअसल सारी-की-सारी ग़लती उसी की है। क्या ज़रूरत है सातवें आसमान नीचे उतरकर आने की? अल्लाह के बाद बाक़ी ज़िम्मेदारी है ट्रकों की, बसों की, कारों की, दुकानों की, पर्यटक वाहनों की और कारख़ानों की; ये चीज़ें थी तभी दंगाई बेचारे आगज़नी को मजबूर हुए।

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Monday, September 10, 2007

क्रांतिकारियों के लिए सूत्र : जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

famous author george bernard shaw“क्रांतिकारियों के लिए सूत्र” जॉर्ज बर्नार्ड शॉ या जीबीएस, जैसा कि आम तौर पर उन्हें कहा जाता है, की सबसे कम चर्चित रचनाओं में से एक है। जीबीएस ने १९०३ में यह संक्षिप्त किताब लिखी थी। इस किताब में विभिन्न विषयों पर छोटे-छोटे सूत्र दिए गए हैं। मुझे इसकी ख़ासियत यह लगी कि इसके गूढ़ सूत्र जगह-जगह व्यांग्यत्मक लहज़े से भी परिपूर्ण हैं। इस किताब के सूत्रों के बारे में यह बात बिल्कुल सही लगती है – “देखन में छोटे लगें, घाव करें गम्भीर”। उदाहरण के लिए सबसे पहले सूत्र पर ही ग़ौर फ़रमाएँ –

एकमात्र स्वर्णिम सूत्र यह है कि कोई भी स्वर्णिम सूत्र नहीं है।
(The only golden rule is that there are no golden rules.)

शिक्षा पर जीबीएस कहते हैं –

जो कर सकता है, वह करता है और जो नहीं कर सकता, वह पढ़ाता है।
(He who can, does. He who cannot, teaches.)

पढ़ा-लिखा इंसान दरअसल एक फ़ालतू व्यक्ति है, जो पढ़ने में वक़्त बर्बाद करता है। उसके झूठे ज्ञान से सावधान रहो : यह अज्ञान से भी ख़तरनाक है।
(A learned man is an idler who kills time with study. Beware of his false knowledge : it is more dangerous than ignorance.)

खुद करके देखना ही ज्ञान अर्जित करने का अकेला मार्ग है।
(Activity is the only road to knowledge.)

भाषा पर जीबीएस ने बहुत मार्के की बात कही है, जो भारत के आज के हालात में बहुत सही बैठती है –

कोई भी इंसान जो खुद अपनी भाषा में सक्षम नहीं है, कभी भी दूसरी भाषा पर अधिकार प्राप्त नहीं कर सकता।
(No man fully capable of his own language ever masters another.)

यह किताब इंटरनेट पर भी उपलब्ध है। आप इसे यहाँ पढ़ सकते हैं –
क्रांतिकारियों के लिए सूत्र : जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

नोट : इन सूत्रों का हिन्दी भावानुवाद मैंने किया है। इसलिए हो सकता है कि इनमें ग़लतियाँ रह गई हों। तो आप टिप्पणी करके बताएँ, इससे पहले ही मैं एड्वांस में माफ़ी मांग लेता हूँ। :)

पढ़िए किताबों से जुड़ी कुछ और पोस्ट्स -
१. मुफ़्त डाउनलोड करें हिन्दी ई-किताबें और साहित्य
२. ऑनलाइन हिन्दी साहित्य
३. हिन्दी पत्रिका "हंस" इंटरनेट पर

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हिन्दी कॉमिक्स के शौक़ीनों के लिए

Famous Indian Coimcs Characters Chacha Chaudhary & Sabuशायद ही कोई हो जो बचपन में चाचा चौधरी, साबू, बिल्लू, पिंकी, नागराज, राम-रहीम जैसे कॉमिक पात्रों का दीवाना न रहा हो। बचपन में चंचल शरीर को केवल ये आकर्षक कॉमिक्स ही कुछ देर के लिए शांत बैठने पर मजबूर कर पाती थीं। तो एक बार फिर बचपन की यादों को ताज़ा कीजिए इन रोचक कॉमिक्स के साथ। राज कॉमिक्स की वेबसाइट पर आप ऑनलाइन पढ़ सकते हैं सुपर कमाण्डो ध्रुव, बांकेलाल और डोगा वगैरह की कई सारी कॉमिक्स बिल्कुल मुफ़्त। इंडियन कॉमिक्स से भी आप बहुतेरी हिन्दी कॉमिक्स डाउनलोड कर सकते हैं। साथ ही विशाल पटेल की वेबसाइट पर चाचा चौधरी की कई सारी कॉमिक्स पढ़ी जा सकती हैं। अगर आपको भी हिन्दुस्तानी कॉमिक्स का कोई ऑनलाइन स्रोत पता हो, तो कृपया ज़रूर बतलाएँ।

पढ़िए यह भी : भारतीय कॉमिक्स : चाचा चौधरी और साबू

यह पोस्ट लिखने के बाद एक कॉमिक मैंने भी पढ़ी... बांकेलाल की। मज़ा आ गया तुम्हारी कसम। किस तरह कनकच्चा ऋषि ने श्राप दिया, किस तरह बांकेलाल ने बजरबट्ट से पीछा छुड़ाकर कनकटा दैत्य को परास्त किया... एक बार फिर, मज़ा आ गया। :)

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Sunday, September 09, 2007

मदर टेरेसा : टीस से भरी एक ज़िन्दगी

Mother Teresa of Calcutta : Shaken faithमदर टेरेसा आज भी दुनिया के लिए एक मिसाल हैं। उन्होंने दिखलाया कि किस तरह अपना सर्वस्व समर्पित कर दीन-हीनों और निराश्रितों की सेवा की जाती है। लेकिन हाल में आई एक किताब “मदर टेरेसा : कम बी माई लाइट” (Mother Teresa : Come Be My Light) ने ईश्वर पर उनकी आस्था को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं। किताब में मदर के कई ख़तों को प्रकाशित किया गया है, जिससे यह पता लगता है कि अपनी ज़िन्दगी के आख़िरी वक़्त तक वे ईश्वर के अस्तित्व को लेकर संशय में थीं। इन ख़तों में बार-बार मदर ने कहा कि उन्हें महसूस होता है कि ईश्वर नहीं है, क्योंकि उन्हें न तो कभी उसकी अनुभूति हुई और न ही कभी प्रार्थनाओं का जवाब मिला। क्रिसमस के बाद लिखे गए एक पत्र में मदर टेरेसा ने लिखा, “मेरे लिए सन्नाटा और खालीपन बहुत गहरा है। इतना गहरा कि मैं देखना चाहती हूँ और देख नहीं पाती, सुनना चाहती हूँ और सुनाई नहीं देता।”

ये सभी पत्र ऐसे लोगों को लिखे गए थे, जो उनके बहुत क़रीबी थे। सार्वजनिक तौर पर उन्होंने हमेशा इस तरह दर्शाया मानो उन्हें अपेक्षित अनुभूति हो चुकी है। क्या यह मज़हबों के पाखण्ड को नहीं दिखलाता है? हालाँकि उनका कार्य निश्चय ही महान था, लेकिन अगर वे यह कहतीं कि ईश्वर नहीं है तो क्या चर्च उन्हें मान्यता देता? क्या अपने जीवन के अंत में भी पाखण्ड की पीड़ा के साथ नहीं मरी होंगी? हालाँकि उनका काम महान था, लेकिन क्या यह टीस उससे भी बड़ी नहीं रही होगी? ईश्वर की बहुतेरी अजीबोग़रीब धारणाएँ गढ़ कर और उसे आस्था के जर्जर आधार पर टिकाकर, क्या मज़हबों ने लोगों को छला नहीं है? क्या बेहतर न होता कि ईसा के नाम पर लोगों की सेवा करने की बजाय वे खुद अपने लिए इसे छोड़ सत्य को खोजने का साहस करतीं? शायद ऐसा करने से वे मरते वक़्त ज़्यादा संतुष्ट होतीं। अंत में मदर की एक प्रसिद्ध कविता Anyway की पंक्तियाँ -

People are often unreasonable, illogical and self centered;
Forgive them anyway.

If you are kind, people may accuse you of selfish, ulterior motives;
Be kind anyway.

If you are successful, you will win some false friends and some true enemies;
Succeed anyway.

If you are honest and frank, people may cheat you;
Be honest and frank anyway.

What you spend years building, someone could destroy overnight;
Build anyway.

If you find serenity and happiness, they may be jealous;
Be happy anyway.

The good you do today, people will often forget tomorrow;
Do good anyway.

Give the world the best you have, and it may never be enough;
Give the world the best you've got anyway.

You see, in the final analysis, it is between you and your God;
It was never between you and them anyway.

लेकिन जब खुद मदर और “उनके भगवान” के बीच ही वास्तविक विश्वास का रिश्ता न क़ायम हो सका, तो क्या ये अंतिम पंक्तियाँ खोखलेपन की गूंज नहीं लगती हैं?

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Saturday, September 08, 2007

बुश का बेवकूफ़ाना कारनामा एक बार फिर

US President George W. Bush | संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुशअपनी बेवकूफ़ियों के लिए मशहूर बुश ने एक बार फिर ऐसा कारनामा किया, जिससे लोगों में उनकी मूर्खता के लिए बचा-खुचा शक भी ख़त्म हो गया। बुश की ज़ुबान फ़िसलना तब शुरू हुई, जब बुश ने शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया में “एपेक” सम्मेलन से पहले अपने सम्बोधन में कहा, “‘ऑपेक’ सम्मेलन की बेहतरीन तरीक़े से मेज़बानी करने के लिए शुक्रिया।” फिर बुश ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री जॉन होवार्ड की ईराक़ यात्रा को भी याद किया, जिसमें वे ईराक़ में “ऑस्ट्रिया” के सैनिकों से मिलने गए थे। यह अलग बात है कि ईराक़ में ऑस्ट्रिया का कोई सैनिक नहीं है। अलबत्ता वहाँ ऑस्ट्रेलिया के १,५०० सैनिक ज़रूर तैनात हैं। इसके बाद बुश शायद यह भी भूल गए कि वे मंच पर कहाँ से चढ़े थे और उतरने के लिए मंच के उस छोर पर पहुँच गए, जहाँ बदकिस्मती से उतरने के लिए सीढ़ियाँ थी ही नहीं।

इसीलिए कहते हैं कि इंसान को ज़रूरत से ज़्यादा तनाव से बचना चाहिए। दिमाग़ में अगर हर समय ईराक़, कोरिया, पाकिस्तान, ओसामा वगैरह ही चलता रहे तो बेचारे इंसान की क्या हालत हो जाती है!!! वैसे, बुश की एकमात्र बड़ी उपलब्धि यह है कि वे सारी संस्कृतियों, देशों की सीमाओं को तोड़ते हुए दुनिया भर में मूर्खता के निर्विवाद प्रतीक बन गए हैं। १ अप्रैल को लोग अब ऐसे कार्ड देने लगे हैं, जिनके ऊपर बुश की तस्वीर छपी होती है। और तो और, आजकल लोग बेवकूफ़, मूर्ख वगैरह के पर्यायवाची के रूप में “बुश” शब्द का भी प्रयोग करने लगे हैं। है न वाक़ई बड़ी उपलब्धि? अगर टाइम हो तो बुश पर एक मज़ेदार चुटकुला भी टाइमपास पर पढ़िए।

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Thursday, August 16, 2007

सेक्स के २३७ कारण

गहन शोध के बाद शोधकर्ताओं ने २३७ ऐसे कारण चिह्नित किए हैं, जो लोगों को सेक्स के लिए प्रेरित करते हैं। शोध के मुताबिक़, यह देखा गया है कि युवा अमूमन एक से कारणों के चलते एक-दूसरे के क़रीब आते हैं। कॉलेज जाने वाले ज़्यादातर युवाओं का कहना था कि दूसरों की तरफ़ आकर्षित होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि वे “शारीरिक सुख” का अनुभव करना चाहते हैं और यह “अच्छा महसूस होता है”।

प्रेम की अभिव्यक्ति और लगाव ज़ाहिर करना, पुरुषों और स्त्रियों दोनों के लिए शुरुआती १० कारणों में शुमार करता है। लेकिन इनको पीछे ढकेलने वाला नं. १ कारण है – “मैं उसकी तरफ़ आकर्षित हूँ”। २३७ कारणों में से सबसे अजीब है “बदला लेने के लिए सेक्स”।

टैक्सस विश्वविद्यालय ने इस शोध को करने के लिए पाँच साल लगाए और खुद अपने पैसे भी ख़र्च किए। डॉ. इरविन गोल्डस्टेन के अनुसार, “‘मेन आर फ़्रॉम मार्स, वीमन आर फ़्रॉम वीनस’ वाला सिद्धांत इस शोध में ग़लत साबित हो गया है, क्योंकि सेक्स के लिए प्रेरित करने वाले कारण स्त्री-पुरुषों में समान पाए गए हैं।” इस शोध पर विस्तार से ख़बर यहाँ पढ़ी जा सकती है।

पता नहीं इस शोध के परिणाम भारत के परिप्रेक्ष्य में कितने सार्थक हैं, क्योंकि यह शोध अमेरिका में किया गया है। सेक्स को लेकर अमेरिकी मानसिकता भारत से कितनी अलग है, यह तो तभी पता चल सकता है जब भारत में भी इस तरह का कोई शोध व्यापक पैमाने पर किया जाए।

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Tuesday, August 14, 2007

दो बार अवतरित होते-होते रह गए बुद्ध

J Krishnamurtiआज ज्ञानदत्तजी ने कहा कि अगर बुद्ध पैदा होना चाहेंगे तो कोई नहीं रोक सकता, बस ज़रूरत है तो सही परिस्थितियों की। भगवान बुद्ध ने वचन दिया था कि वे मैत्रेय के रूप में फिर आएंगे। शायद यही कारण है कि पिछली सदी में दो बार यह घोषित किया जा चुका है कि बुद्ध आ गए हैं। सृजन शिल्पी जी यह पहले ही अपनी पोस्ट ‘जब बुद्ध ढ़ाई हज़ार साल बाद फिर लौटे’ में बतला चुके हैं कि १९८८ में किस तरह ओशो ने यह घोषणा की थी मैत्रेय बुद्ध की आत्मा उनमें प्रविष्ट हो गई है। हालाँकि कुछ ही दिनों बाद ओशो ने कहा कि मैत्रेय उनके शरीर को छोड़ चुके हैं, क्योंकि परिस्थितियाँ अभी अनुकूल नहीं हैं।

इससे पहले भी थोयोसॉफ़िकल सोसायटी द्वारा बड़े पैमाने पर मैत्रेय बुद्ध की आत्मा के आगमन की तैयारी की गई थी। इसके लिए थियोसॉफ़िस्ट्स द्वारा बचपन से ही जे कृष्णमूर्ति को मैत्रेय की आत्मा के वहन के लिए ख़ास तौर पर तैयार किया गया था। मैत्रेय बुद्ध के आगमन के लिए एक संगठन भी खड़ा किया गया – ऑर्डर ऑफ़ द स्टार। जिसका प्रमुख जे कृष्णमूर्ति को घोषित किया गया था। इस संगठन के लगभग सत्तर हज़ार सदस्य थे, जो कृष्णमूर्ति को बुद्ध का अवतार समझते थे। लेकिन जे कृष्णमूर्ति वाक़ई बुद्ध की तरह ही क्रांतिकारी विचारों के निकले और सन् १९२९ में एक प्रसिद्ध व्याख्यान के ज़रिए उन्होंने ‘ऑर्डर ऑफ़ द स्टार’ को भंग कर दिया। कृष्णमूर्ति ने अपने व्याख्यान में कहा –

“सत्य एक मार्गविहीन मंज़िल है और कोई भी सत्य तक किसी भी मज़हब या सम्प्रदाय के माध्यम से नहीं पहुँच सकता है। यह मेरा दृष्टिकोण है और मैं इससे पूर्णतः सहमत हूँ। सत्य; जोकि निःसीम, बिनाशर्त, पथविहीन है, संगठित नहीं किया जा सकता है और न ही ऐसा कोई संगठन खड़ा किया जा सकता है जो लोगों को सत्य की तरफ़ ले जाने का दावा कर सके। ...” पूरा भाषण यहाँ पढ़ा जा सकता है।

जिद्दू कृष्णमूर्ति द्वारा मैत्रेय होने की बात नकारे जाने पर उनसे सब कुछ ले लिया गया, जो भी ‘ऑर्डर ऑफ़ द स्टार’ के सदस्यों और थियोसॉफ़िस्ट्स द्वारा उन्हें दिया गया था। हालाँकि इसके बाद भी कृष्णमूर्ति ने अपनी शिक्षाएँ देना जारी रखा और पूरी दुनिया में, ख़ास तौर पर भारत, अमेरिका और ब्रिटेन में अपने स्वतंत्र विचारों से लोगों को परिचित कराते रहे।

पढ़िए:
१. जे कृष्णमूर्ति की प्रसिद्ध किताब ‘द फ़र्स्ट एण्ड द लास्ट फ़्रीडम’
२. जे कृष्णमूर्ति का सम्पूर्ण साहित्य

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भारतीय विद्वानों ने की न्यूटन से पहले गणित की महत्वपूर्ण खोज

गणित के महत्वपूर्ण सिद्धांत की खोज, जिसका श्रेय सर आइज़ेक न्यूटन को दिया जाता है, दरअसल भारतीय विद्वानों की खोज थी। न्यूटन से क़रीब ढाई सौ साल पहले केरल के गणितज्ञों ने कैलकुलस के मूलभूत सिद्धांतों में से एक ‘अनंत श्रेणी’ (Infinite Series) की खोज की थी। इस तथ्य का खुलासा हाल में लन्दन में किए गए एक शोध से हुआ है। मेनचेस्टर विश्वविद्यालय के डॉ. जॉर्ज जोसेफ़ के मुताबिक़ सन् १३५० ई. के आस-पास गणित के ‘केरल स्कूल’ में पाई शृंखला की भी खोज की थी और पाई का मान १७ अंकों तक सही-सही निकाला था। यह भारतीय खोज केरल की जेसुइट मिशनरियों के ज़रिए इंग्लैंड पहुँची व उन्हीं से इसकी जानकारी न्यूटन को भी हुई। बाद में इसकी खोज का श्रेय न्यूटन को ही दिया गया। यह ख़बर विस्तार से यहाँ पढ़ें

दुर्भाग्य की बात यह नहीं है कि इसका श्रेय किसी ग़ैरहिन्दुस्तानी को मिला, बल्कि यह है कि ये बात भी लन्दन में शोध के दौरान सामने आई। क्या हम भारतीय इतने जड़ हो चुके हैं कि अपनी उपलब्धियों को भी इस तरह भुला देते हैं, मानो कोई भारी भूल कर दी हो। फिर अपने इतिहास से इतने अनभिज्ञ रहने की कोशिश करते हैं, जैसे हमारे इतिहास में कुछ अच्छा हो ही नहीं सकता। अजंता-एलोरा, एलीफ़ेण्टा, सिन्धुघाटी की सभ्यता आदि ज़्यादातर खोजें पश्चिमीं विद्वानों द्वारा की गई हैं और दुःख है कि शायद ही भारतीयों ने अपनी थाती को खंगालने की कभी कोशिश तक की हो। क्या यह मानसिकता कभी बदल भी पाएगी?

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Monday, August 13, 2007

दो ग़रीब चिट्ठाकारों की भेंटवार्ता

मीट करने के इस बेहतरीन मौसम में, जबकि हर किसी के मीट करने का मीटर बढ़ता जा रहा है, हमारा ज़ीरो पर अटका हुआ था। सो मुरैना के ब्लॉगर श्री भुवनेश शर्मा से कल मुलाक़ात करने का मौक़ा हाथ लगा, तो उसे हमने झट से दबोच लिया। तो टेलीफ़ून पर भुवनेश भाई से पहले ही मीटियाने का वक़्त मुकर्रर किया और उन्हें आगरा में अपने ग़रीबख़ाने पर आमंत्रित कर लिया। हमें पूरी उम्मीद थी कि भुवनेश भाई डिजिटल कैमरा लेकर मीटियाने आएंगे, ताकि बाद में भेंटवार्ता का ज़ोरदार सचित्र विवरण अपने ब्लॉग पर चिपकाया जा सके। लेकिन वे भी हमारी तरह निकले, यानी कि ग़रीब टाइप। अब आप पूछेंगे कि ग़रीब कैसे? हम दोनों के पास तो कम्प्यूटर वगैरह है। लेकिन चिट्ठाकारों की जमात में जिसके पास डिजिटल कैमरा नहीं, हमारे हिसाब से वह ग़रीब है। जिस तरह कार वालों की जमात में मारुति ८०० वाला ग़रीब समझा जाता है। वैसे भी जब तक भेंटवार्ता के विवरण के साथ बढ़िया-सा फ़ोटू न चमचमाए, तब तक भेंटवार्ता करने का न कोई फ़ायदा है और न ही कोई सबूत।

ख़ैर, दोनों ग़रीब ब्लॉगर्स ने निहायत ही दुःखी मन से बातचीत शुरू की। जैसा कि होना लाज़मी था, हिन्दी ब्लॉग जगत के मुख़्तलिफ़ पहलुओं पर हम दोनों काफ़ी देर तक बतियाते रहे। बहुतेरे ब्लॉगर्स का भी ज़िक्र आता-जाता रहा, लेकिन दुर्भाग्यवश निन्दा-सुख से हमें पूरी तरह वंचित रहना पड़ा। ज़रूरत से ज़्यादा भले टाइप के लोगों से बातचीत करने का यही नुक़सान है। बात आगे बढ़ती रही और साथ में खाने-पीने का काम भी चलता रहा। न... न... “पीने” से कुछ और मतलब मत निकालिए, महज़ तुक के लिए जोड़ दिया है। काफ़ी देत यूँ ही चर्चा चलती रही, फिर उसका रुख़ बदलकर देश-समाज वगैरह-वगैरह की समस्याओं की तरफ़ चला गया। इस तरह की बात करके लगता है कि अपन की अक़ल में भी बुद्धि है... तो अपन ने अपनी अक़ल का पूरा इस्तेमाल करते हुए बातचीत का कंवर्सेशन जारी रखा।

लेकिन जैसे ही दुनिया की सारी समस्याएँ सुलझने की कगार पर पहुँच गई थीं, तभी भुवनेश भाई को याद आया कि उनकी ट्रेन का वक़्त भी होने वाल है। निकलना ज़रूरी था, इसलिए उन समस्याओं को अधसुलझा छोड़कर उन्हें लेकर मैं रेलवे स्टेशन की ओर चल दिया। कमाल की बात यह कि टिकिट-विकिट भी जल्दी मिल गई और कमाल-पर-कमाल यह कि सात मिनट बाद ट्रेन भी बिल्कुल ठीक समय पर आ गई। भारतीय रेल के इस कारनामे से हम दोनों को शॉक तो काफ़ी लगा, लेकिन किसी तरह अपने को सम्हालते हुए मैंने भुवनेश भाई को विदा किया। और इस तरह दो ग़रीब चिट्ठाकारों की भेंटवार्ता बिना फ़ोटू लिए ही “इति सम्पन्नम्” हो गई।

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Sunday, August 12, 2007

राइनाइटिस ऍलर्जी का आयुर्वेदिक उपचार

क्या आपकी नाक हमेशा अगर एक बार बहना शुरू हो जाए, तो थमने का नाम नहीं लेती? छींक पर छींक आती रहती हैं? आँखों से आँसू बहने लगते है और गले में खराश पैदा हो जाती है? अगर इन सवालों का जवाब “हाँ” है, तो आप राइनाइटिस ऍलर्जी के शिकार हैं। दुर्भाग्यवश ऍलोपेथी में इसकी रोकथाम के उपाय तो हैं, लेकिन जड़ से सही करने का कोई इलाज नहीं है।

हालाँकि इस व्याधि में आयुर्वेदिक उपचार बहुत कारगर है। आयुर्वेद का प्रयोग कर इस बीमारी से पूरी तरह निजात पा सकते हैं। इसके लिए कुछ ख़ास बातें ध्यान में रखनी होंगी –


  • “अणु तैल” की दो-दो बूंदों से दिन में दो