बुश का बेवकूफ़ाना कारनामा एक बार फिर
अपनी बेवकूफ़ियों के लिए मशहूर बुश ने एक बार फिर ऐसा कारनामा किया, जिससे लोगों में उनकी मूर्खता के लिए बचा-खुचा शक भी ख़त्म हो गया। बुश की ज़ुबान फ़िसलना तब शुरू हुई, जब बुश ने शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया में “एपेक” सम्मेलन से पहले अपने सम्बोधन में कहा, “‘ऑपेक’ सम्मेलन की बेहतरीन तरीक़े से मेज़बानी करने के लिए शुक्रिया।” फिर बुश ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री जॉन होवार्ड की ईराक़ यात्रा को भी याद किया, जिसमें वे ईराक़ में “ऑस्ट्रिया” के सैनिकों से मिलने गए थे। यह अलग बात है कि ईराक़ में ऑस्ट्रिया का कोई सैनिक नहीं है। अलबत्ता वहाँ ऑस्ट्रेलिया के १,५०० सैनिक ज़रूर तैनात हैं। इसके बाद बुश शायद यह भी भूल गए कि वे मंच पर कहाँ से चढ़े थे और उतरने के लिए मंच के उस छोर पर पहुँच गए, जहाँ बदकिस्मती से उतरने के लिए सीढ़ियाँ थी ही नहीं।इसीलिए कहते हैं कि इंसान को ज़रूरत से ज़्यादा तनाव से बचना चाहिए। दिमाग़ में अगर हर समय ईराक़, कोरिया, पाकिस्तान, ओसामा वगैरह ही चलता रहे तो बेचारे इंसान की क्या हालत हो जाती है!!! वैसे, बुश की एकमात्र बड़ी उपलब्धि यह है कि वे सारी संस्कृतियों, देशों की सीमाओं को तोड़ते हुए दुनिया भर में मूर्खता के निर्विवाद प्रतीक बन गए हैं। १ अप्रैल को लोग अब ऐसे कार्ड देने लगे हैं, जिनके ऊपर बुश की तस्वीर छपी होती है। और तो और, आजकल लोग बेवकूफ़, मूर्ख वगैरह के पर्यायवाची के रूप में “बुश” शब्द का भी प्रयोग करने लगे हैं। है न वाक़ई बड़ी उपलब्धि? अगर टाइम हो तो बुश पर एक मज़ेदार चुटकुला भी टाइमपास पर पढ़िए।
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