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Saturday, January 12, 2008

WATCH HINDI TV STREAMING ONLINE

Friends! Here’s good news for all of desi TV lovers. I’ve been to US and can understand that American TV shows are very draggy for those who have Indian taste for entertainment. But now you can enjoy most of Hindi television channels like star plus, star one, sony, zee etc. online. Even you can get to watch almost all the Hindi news channels like aaj tak, star news, zee news, india tv and NDTV etc. too. This is the list of absolutely free resources for you:

1. www.techsatishdesi.com
2. www.idesitv.com

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देखिए हिन्दी टीवी स्ट्रीमिंग ऑनलाइन

दोस्तो! मेरे पास हिन्दी टीवी प्रेमियों के लिए एक ख़ास ख़बर है। मैं अमेरिका जा चुका हूँ और जानता हूँ कि अमरीकी टीवी कार्यक्रम हम हिन्दुस्तानियों के हिसाब से कितने उबाऊ होते हैं। लेकिन अब आप ज़्यादातर हिन्दी टीवी चैनल जैसे कि स्टार प्लस, स्टार वन, सोनी और ज़ी टीवी वगैरह का लुत्फ़ इंटरनेट पर उठा सकते हैं। यहाँ तक कि आप आजतक, स्टार न्यूज़, ज़ी न्यूज़, इंडिया टीवी और एनडीटीवी जैसे अधिकांश हिन्दी ख़बरिया चैनल भी ऑनलाइन देख सकते हैं। तो फिर देर किस बात की, तुरंत देखिए:

1. www.techsatishdesi.com
2. www.idesitv.com

सम्बन्धित लेख :
1. लाइव स्ट्रीमिंग भारतीय टीवी चैनल

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Tuesday, June 26, 2007

“आउटसोर्सिंग के आगे जहाँ और भी हैं”

हाल में “वर्ल्ड इज़ फ़्लैट” पढ़ी। बढ़िया किताब है। कम-से-कम हिन्दुस्तानी तो इसे पढ़कर ख़ुश हो ही सकते हैं। इसके शुरू के अध्यायों में भारत को आउटसोर्स की जाने वाली सेवाओं का ख़ासा उल्लेख है। हम लोग भी आजकल आउटसोर्सिंग पर काफ़ी मुग्ध हैं। लेकिन अगर देखा जाए तो यह एक दोयम दर्जे का काम है। अगर तुलना करनी हो तो मैं आउटसोर्सिंग के काम में लगे भारतीयों की तुलना मज़दूरों से करूंगा। “तेजस्वी मन” (Ignited Minds) में राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने ज्ञान-आधारित समाज के तौर पर भारत को विकसित करने की बात कही है। और हम उस दिशा में कुछ-कुछ बढ़ भी रहे हैं। लेकिन विडम्बना यह है कि इस सूचना-केन्द्रित समाज में हम सूचना-मज़दूर भर बनकर रह गए हैं। जोकि पश्चिम (ख़ास तौर पर अमेरिका) के लिए मज़दूरी कर रहे हैं। हमारी बड़ी कम्पनियों को ही लीजिए, जैसे कि इंफ़ोसिस। इंफ़ोसिस का काम भी दूसरों के लिए उत्पादों को तैयार करना भर है, न कि खुद के लिए उत्पाद बनाना।

यानी कि मेहनत तो पूरी हमारी ही है लेकिन फ़ायदा तो उनका ज़्यादा है, जिनका उत्पाद है। भारत को अब आउटसोर्सिंग से आगे सोचने की ज़रूरत है। अब हमें ऐसे प्रोडक्ट तैयार करने की ज़रूरत है, जो अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में अपनी पहचान बना सकें। और मेरे ख़्याल से ऐसा होना ज़्यादा मुश्किल नहीं है, क्योंकि आईटी के क्षेत्र में “ब्राण्ड इण्डिया” एक जाना-पहचाना और भरोसेमन्द नाम है। दिक़्क़त केवल इतनी है कि मार्केटिंग में हम कमज़ोर हैं। दूसरों के लिए हम चीज़ें (विशेषतः सॉफ़्टवेयर) बना सकते हैं, लेकिन खुद ब्रांड के तौर पर उनको विश्व-बाज़ार में मार्केट न कर पाना हमारी कमज़ोरी है। और आज की दुनिया में सारा खेल मार्केटिंग का ही है। पता नहीं यह भी समस्या है या नहीं, क्योंकि शायद ही अभी तक किसी भारतीय आईटी कम्पनी ने अपने नाम से कोई बड़ा उत्पाद बाज़ार में उतारा हो। शायद हमें यह भय अधिक है कि हम विफल हो जाएंगे। लेकिन दुनिया में ब्रांड इंडिया का सिक्का चलने के बाद हमें चुनौतियों को स्वीकारना शुरू करना चाहिए और आउटसोर्सिंग से संतुष्ट होने की बजाय बड़ी अमेरिकी कम्पनियों से प्रतिस्पर्धा के लिए कटिबद्ध हो जाना चाहिए।

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