Remove Ad

Hindi Blog

Movie Blogs | Cricket Blogs | Jyotish Blogs | Equity Blogs | Hindi Blogs | Filmy2 Timepass | Hindi Songs | Bollywood Gossips

Monday, August 13, 2007

वेद भाष्यों पर कुछ विचार

Ancient Vedic Textपिछले कुछ समय में वैदिक संहिताओं के कई एक भाष्यों के अवलोकन का मौक़ा मिला। संहिताओं के भाष्यों में मेरे ख़्याल से सायण, मैक्समूलर, महर्षि दयानन्द सरस्वती और श्री अरविन्द के भाष्य मुख्य हैं। वैदिक संहिताओं की संस्कृत बहुत पुरानी और जटिल है। कई शब्द ऐसे हैं जिसके बारे में निरुक्तकार मुनि यास्क तक ने कहा है कि उन शब्दों का अर्थ वे नहीं जानते। ऐसे में वैदिक संहिताओं पर भाष्य लिखना अपने-आप में बहुत ही दुष्कर कार्य है। वैदिक संस्कृत के बारे में स्वामी विवेकानन्द का कहना था – “वैदिक संस्कृत इतनी जटिल है और इसकी व्याकरण अपने आप में इतनी पूर्ण है, कि एक-एक शब्द को लेकर वर्षों तक शास्त्रार्थ किया जा सकता है।” इस कारण समस्या यह है कि जो भाष्य उपलब्ध हैं, उनमें किए गए अर्थ न केवल भिन्न हैं बल्कि कई ऋचाओं में तो परस्पर विरोधी अर्थ भी देखने को मिल जाते हैं।

सबसे प्राचीन भाष्य, जो अभी भी उपलब्ध है, सायण का है। सायण का भाष्य काफ़ी हद तक कर्मकाण्डपरक है। कह सकते हैं कि संहिताओं का अर्थ करने के लिए सायण ने ब्राह्मण ग्रंथों की परम्परा को सबसे पुख़्ता आधार माना है। वैसे भी सायण-भाष्य में पूर्वमीमांसा का गहरा प्रभाव साफ़ नज़र आता है। सायण भाष्य के बारे में महर्षि अरविन्द का कथन है – “सायण की प्रणाली की केन्द्रिय त्रुटि यह है कि वह सदा कर्मकाण्ड विधि में ही ग्रस्त रहता है और निरंतर वेद के आशय को बलपूर्वक कर्मकाण्ड के संकुचित सांचे में डालकर वैसा ही रूप देने का यत्न करता है। फिर भी सायण का ग्रंथ एक ऐसी चाबी है जिसने वेद के आंतरिक आशय पर दोहरा ताला लगा दिया है, तो भी वह वैदिक शिक्षा की प्रारम्भिक कोठरियों को खोलने के लिए अत्यंत अनिवार्य है।” तो सायण भाष्य पढ़कर कोई इतना भर कह सकता है कि यह ब्राह्मण-ग्रंथों का एक्सटेंशन भर है।

मैक्समूलर को आधुनिक सायण कहा जा सकता है। मैक्समूलर के अथक प्रयासों के फलस्वरूप वैदिक संहिताएँ फिर प्रकाश में आईं। मैक्समूलर के भाष्य से पहले वैदिक संहिताओं को प्राप्त करना दुःसाध्य काम था। आम जनता की क्या कहें, पण्डितों में से भी अधिकांश ने कभी संहिताओं को देखा तक नहीं था। लेकिन मैक्समूलर के भाष्य का सबसे बड़ा दोष यह है भाष्यकार को संस्कृत का गम्भीर ज्ञान न होने की वजह से ज़्यादातर अर्थ सतही ही रह जाता है। इसके अलावा कई पूर्वाग्रह भी साफ़ तौर पर परिलक्षित होते हैं, हालाँकि हो सकता है ऐसा जानबूझ न हो बल्कि अवचेतन रूप से हो गया हो। दूसरा, मैक्समूलर ने कई औसत बुद्धि पण्डितों की सहायता से भाष्य तैयार किया था, इसलिए भाष्य का स्तर उतना अच्छा नहीं है। साथ ही भाष्य में जगह-जगह ‘कंसिस्टेंसी’ का अभाव है।

महर्षि दयानन्द ने “निरुक्त” के आधार पर वैदिक संहिताओं का एक नितांत अलग अर्थ ही किया है, जिसे शायद उनसे पहले किसी ने सोचा भी नहीं था। महर्षि दयानन्द सरस्वती ने धातुओं की अनेकार्थकता का प्रयोग कर अपने विवेक से वेदों का सुसामंजस्यपूर्ण अर्थ किया है, जो काफ़ी हद तक मौलिक काम है। हालाँकि कई विद्वानों का मानना है कि उनके द्वारा किया गया भाष्य संस्कृत-प्रदत्त शब्द की अनेकार्थकता के बेहतरीन प्रयोग के सिवा कुछ नहीं है। दयानन्द के भाष्य पर स्वामी विवेकानन्द का मत है कि “वैदिक संहिताओं के जिस नवीन अर्थ के आधार पर महर्षि दयानन्द सरस्वती ने एक सामंजस्यपूर्ण धर्म के निर्माण की चेष्टा की है, उपनिषदों के आधार पर बिना अधिक भाषा-शास्त्रीय पाण्डित्य के उसे सहज ही स्थापित किया जा सकता है।” समस्या यह है कि महर्षि दयानन्द सरस्वती के इस अर्थ को किसी प्राचीन भाष्यकार या स्मृतिकार से समर्थन नहीं मिलता।

महर्षि अरविन्द का भाष्य आधुनिक काल में सबसे प्रचलित भाष्यों में से एक है। हालाँकि जो अर्थ उन्होंने किया है, उसका आधार उन्होंने ध्यान से प्राप्त अंतःस्फुरण (इंट्यूशन) को बनाया है और भाषा-शास्त्र और संस्कृत व्याकरण को एक तरह से दरकिनार कर दिया है। जिस तरह सायण ने कर्मकाण्डपरक अर्थ की चेष्टा की, मुझे लगता है कि श्री अरविन्द ने आध्यात्मिक अर्थ के प्रति विशेष आग्रह किया है। यानी कि ऐसे कई अवसरों पर जबकि ऋचाओं में कोई सम्भव आध्यात्मिक अर्थ नज़र नहीं आता, श्री अरविन्द ने अध्यात्मपरक व्याख्या की चेष्टा की है। इसके अलावा महर्षि अरविन्द कई जगहों पर अपने अतिमानस के सिद्धांत का साम्य ऋचाओं से दर्शाने की कोशिश करते हैं, जो मेरे ख़्याल से सही नहीं बैठता।

जहाँ तक मुझे लगता है, बिना अष्टाध्यायी और महाभाष्य का अध्ययन किए संहिताओं के अर्थ का ओर-छोर पाना भी असम्भव है। मैं कोई विद्वान नहीं हूँ और मैंने अधिकांश ग्रंथों को हिन्दी या अंग्रेज़ी अनुवाद के साथ पढ़ा है, तो हो सकता है कि मेरी धारणा कई बार ग़लत हो। लेकिन इतना तो तय है कि कोई भी सटीक धारणा केवल तभी बनाई जा सकती है, जबकि ख़ुद मूल ग्रंथ यानी वैदिक संहिताओं का मूल भाषा यानी वैदिक संस्कृत में अध्ययन किया जाए।

टैग:

Labels: , , ,

If you're new here, you may want to subscribe to my RSS feed, or to check similar posts on Hindi Songs and Bollywood Gossips.

Sunday, June 24, 2007

यूनिकोड और वैदिक संस्कृत

हाल में यूनेस्को ने ऋग्वेद संहिता की १८०० से १५०० ईसा पूर्व की ३० प्राचीन पाण्डुलिपियों को सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल किया है। यह ख़बर आप विस्तार से यहाँ पर पढ़ सकते हैं। मेरे ख़्याल ये प्राचीन पाण्डुलिपियाँ ब्राह्मी लिपि में हैं। समय के साथ ब्राह्मी लिपि ही देवनागरी में तब्दील हो गई। वैदिक संस्कृत में ऐसे कई अक्षर और ध्वनियाँ हैं, जो आम तौर पर देवनागरी वर्णमाला में देखने में नहीं आती हैं। उदाहरण के लिए एक वैदिक ऋचा मूल रूप में देखिए –

ओ३म् शन्नो॑ मि॒त्रः शं वरु॑णः॒ शन्नो॑ भवत्वर्य्य॒मा।
शन्न॒ऽइन्द्रो॒ बृह॒स्पतिः॒ शन्नो॒ विष्णु॑रुरुक्र॒मः॥

यहाँ अक्षरों के ऊपर-नीचे बनाई गई रेखाओं (और इसी तरह अप्रचलित बहुत-से दूसरे अक्षरों) का प्रयोग वैदिक संस्कृत में आम है। मैं यह जानना चाहता हूँ कि वैदिक संस्कृत से जुड़े ऐसे सभी अक्षरों और ध्वनिसूचक चिह्नों को कैसे टाइप किया जा सकता है? इसके लिए क्या कोई औज़ार नेट पर उपलब्ध है? या फिर इन्हें टाइप करने का कोई और तरीक़ा है? यह ऋचा मैंने इस साइट की मदद से टाइप की है। यहाँ केवल कुछ ध्वनिसूचक चिह्न ही दिए गए हैं।


यह भी पढ़िए:

१. क्या “वैदिक गणित” वाक़ई “वैदिक” है?
२. रोमन लिपि के साथ हिन्दी का भविष्य
३. हिन्दी में देवनागरी का ग़लत प्रयोग

Labels: , , , ,

If you're new here, you may want to subscribe to my RSS feed, or to check similar posts on Hindi Songs and Bollywood Gossips.

Friday, June 22, 2007

क्या “वैदिक गणित” वाक़ई “वैदिक” है?

Vedic Mathematicsपिछले कुछ दिनों से मैं भारतीकृष्णतीर्थ महाराज कृत “वैदिक गणित” नाम की किताब पढ़ रहा हूँ। इसमें दी गई विधियाँ काफ़ी बढ़िया हैं और तेज़ी से गणना करने में बहुत सहायक हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या भारतीकृष्णतीर्थ महाराज की यह गणित वाक़ई वैदिक गणित है। स्वामी जी का कहना है कि यह गणित कुछ सूत्रों पर स्थापित है और ये सूत्र अथर्ववेद संहिता के परिशिष्ट में उन्होनें पाए थे। हालाँकि वे खुद इस परिशिष्ट को जनता के सामने कभी नहीं रख सके। जहाँ तक सूत्रों की बात है, ये सूत्र साफ़ तौर पर वैदिक संस्कृत में नहीं हैं। बानगी देखिए – “यावदूनं तावदूनीकृत्य वर्गं च योजयेत्” और “ऊर्ध्वतिर्यगभ्याम्” आदि। इसके अलावा इन सूत्रों का जिक्र किसी भी अन्य प्राचीन किताब में नहीं है। जान पड़ता है कि गणित की इस पद्धति का विकास खुद भारतीकृष्णतीर्थ महाराज ने किया है।

इसके उलट आजकल जो गणित प्रचलित है, वह पूरी तरह वैदिक है। यानी कि उसका विकास काफ़ी हद तक वैदिक परम्परा में हुआ है। उदाहरण के लिए दशभू पद्धति का उल्लेख वैदिक संहिताओं में मिलता है, पाइथागोरस प्रमेय सहित बहुतेरी दूसरी प्रमेयों को सूत्र ग्रंथों में पढ़ा जा सकता है। मैंने कहीं पढ़ा है कि कैलकुलस का विकास भी भारत में हुआ है, हालाँकि मुझे नहीं मालूम यह किस ग्रंथ में निबद्ध है। तो मेरे ख़्याल से वर्तमान में प्रचलित गणित “वैदिक गणित” अधिक है, बजाय “वैदिक गणित” के नाम से प्रचलित गणित के। हालाँकि इससे स्वामी जी की “वैदिक गणित” का महत्व कम नहीं होता है, क्योंकि यह अपने आप में बेहतरीन है। लेकिन ऐसे में “वैदिक गणित” को “वैदिक” कहना कितना सही है, जबकि इसका मूल वैदिक नहीं जान पड़ता है और यह कुछ दिनों पहले ही स्वामी भारतीकृष्णतीर्थ जी द्वारा विकसित की गई है? इस बारे में आप लोगों की क्या राय है?

Labels: , , ,

If you're new here, you may want to subscribe to my RSS feed, or to check similar posts on Hindi Songs and Bollywood Gossips.

Monday, November 28, 2005

Get Your Detailed Horoscope for Free

अपनी जन्‍म कुण्‍डली मुफ़्त बनवाएँ

Do you want to get your detailed horoscope for free, which you can get in about Rs. 300-400 in the market? Or you want to match the charts of your daughter or son on your own? Or you just want to read predictions or want to learn astrology? Well... irrespective of whatever you want to do related to astrology, visit this unique and wonderful website:

AstroSage: Free Birth Chart & Web-based Astrology Software

The best thing about this astrology portal is that it is absolutely free. No need to use your credit card anywhere in this portal. You wouldn't have seen any astrology portal like this before.

क्‍या आप अपनी विस्‍तृत जन्‍म पत्री मुफ़्त में चाहते हैं, जो आम-तौर पर बाज़ार में ३०० - ४०० रू. में मिलती है? या फिर आप बिना पण्डित के पास जाए शादी के लिये अपनी बेटी या बेटे के गुण मिलान करना चाहते हैं? या फिर आपका मकसद केवल राशिफल देखना अथवा ज्‍योतिष सीखना है? खैर, ज्‍योतिष से जुड़ा कोई भी काम अगर आप करना चाहते हैं; तो फिर यहाँ जाएँ

AstroSage: Free Birth Chart & Web-based Astrology Software

इस ज्‍योतिष पोर्टल की सबसे ख़ास बात ये है कि यह पूरी तरह मुफ़्त है, मतलब कहीं भी अपना क्रेडिट कार्ड के इस्‍तेमाल की ज़रूरत नहीं है।

Labels: , , , , , ,

If you're new here, you may want to subscribe to my RSS feed, or to check similar posts on Hindi Songs and Bollywood Gossips.