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शुक्रवार, 6 अप्रैल, 2007

हंसी-ठिठोली- "कुत्ते की पूंछ सीधी करके रहूंगा"

दिल्ली में मौसम चुनाव का है तो क्यों न चुनावी भाषण का लुत्फ ले लिया
जाए। इसलिए, "मस्ती की बस्ती" में आज नेता जी का अनूठा भाषण-
एक बार एक नेता जी एक गांव में भाषण देने पहुंचे। टोपी धारक जंतुओं की
श्रेणी में हाल-हाल में दाखिल हुए इस जंतु ने अपने भाषण की शुरुआत कुछ
यूं की।

मुझे भाषण देना नहीं आता
भाषण देना तो नेताओं का काम है
जैसे गांधी जी भाषण दिया करते थे
जैसे नेहरु जी भाषण दिया करते थे
नेहरु जी को "वार" से बड़ा प्यार था
पर वार कई प्रकार के होते हैं
जैसे सोमवार,मंगलवार,बुधवाऱ
लेकिन सबसे खतरनाक वार शेर का होता है
शेर जंगल का राजा है
शरीर का राजा मन है
मन बड़ा चंचल होता है
चंचल मधुबाला की छोटी बहन थी
उसे दिल की बीमारी थी
दिल एक मंदिर है
मंदिर में हिन्दू जाते हैं
मुसलमान मस्जिद में जाते हैं
मस्जिदों में सबसे अनूठी बाबरी मस्जिद है
लेकिन,बाबरी मस्जिद का बवाल ऐसा
कि निपटाए नहीं निपटता
लेकिन,कुछ धर्म स्थल ऐसे हैं
जिन्हें लेकर कोई पंगा नहीं
मसलन गुरुद्वारे
गुरुद्वारे में सिख जाते हैं
सिख बड़े स्वामिभक्त होते हैं
लेकिन जानवरों में सबसे स्वामिभक्त
कुत्ता होता है
कुत्ते की पूंछ हमेशा टेड़ी रहती है
टेड़ी ऐसी कि कोई कुछ कर ले-सीधी नहीं होती
मैं आपसे वादा करता हूं,कि
अगर आपने मुझे जिता दिया
तो मैं इस कुत्ते की पूंछ सीधी करके रहूंगा
मैं इस कुत्ते की पूंछ सीधी करके रहूंगा।
धन्यवाद

नेताजी का ये भाषण तो गप्प की श्रेणी का है-लेकिन हमारे भारतीय नेता भी
कुछ कम नहीं। उनके वादों की भाषा भले कुछ हो-लेकिन उनका लब्बो लुआब
"कुत्ते की पूंछ सीधी सीधी करके रहूंगा" जैसा ही होता है। मजे की बात ये
कि ढीठ इतने कि पांच साल बाद भी कुत्ते की पूंछ सीधी नहीं होती तो फिर
कुत्ते की पूंछ सीधी करने का वादा करके वोट हथियाते हैं। वैसे,जनता की
नादानी यह कि इस रस विहिन लॉलीपॉप को हर दो-चार साल में नेता उनके मुंह
में धर जाता है और वो इस उम्मीद में कि कभी तो इसमें से रस निकलेगा-वोट
देते हैं। नाकारा नेताओं को जीताते हैं।

-गौरी पालीवाल

5 टिप्पणियाँ:

ratna ने कहा...

मस्ती की बस्ती बढ़िया है।

6 अप्रैल, 2007 12:19 अपराह्न  
संजय बेंगाणी ने कहा...

कौन कहता है कुत्ते की पूँछ सीधी नहीं होती?
हमे वोट देना, सीधी करके दिखा देंगे.

6 अप्रैल, 2007 12:23 अपराह्न  
Mired Mirage ने कहा...

बहुत बढ़िया!
घुघूती बासूती

6 अप्रैल, 2007 2:08 अपराह्न  
उडन तश्तरी ने कहा...

बढ़िया है.

6 अप्रैल, 2007 4:48 अपराह्न  
Manvendra Pratap ने कहा...

भाई अच्‍छा लिखा है मजा आ गया है।

7 अप्रैल, 2007 2:30 अपराह्न  

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