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रविवार, 15 अप्रैल, 2007

हंसी-ठिठोली : बड़ा कौन ?

इन दिनों चुनाव की सरगर्मी ज़ोरों पर है। एक नेता जी का चुनावी भाषण आपको पहले सुनाया जा चुका है। आज एक इंस्पेक्टर राम भरोसे का खेल सुनिए।

दरअसल, एक इलाके में चुनाव की सरगर्मियां ज़ोरों पर थी। आला पुलिस अधिकारी दौरों पर दौरे कर रहे थे। इसी वक्त, इंस्पेक्टर रामभरोसे का अपने एसपी के साथ अपने गांव पहुंचना हुआ। दोनों सादी वर्दी में थे-लेकिन पुलिस की जीप से उतरे तो मजमा लग गया। रामभरोसे काफी साल बाद अपने गांव पहुंचा था-सो पुलिस की जीप से उतरते देख लोगों को पहले शक हुआ कि कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं। लेकिन,रामभरोसे को हंसी-ठिठोली करते देख लोग समझ गए कि हो न हो ये पुलिस में भरती हो चुका है।

लोगों ने दोनों की खूब पेट पूजा करायी। इसी दौरान, गांव के एक शख्स ने पूछा कि रामभरोसे पुलिस मे कितने बड़े अधिकारी हो और ये जो तुम्हारे साथ आए हैं-ये कौन हैं?

रामभरोसे ने सीना तान कर जवाब दिया कि ये जो हमारे साथ आए हैं-हमारे महकमे में एसपी है और मैं डीआईजी।

यह सुनकर पास बैठे एसपी साहब का माथा ठनक गया। लेकिन,उन्होंने उस वक्त तो कुछ नहीं कहा। दोनों ने खा-पीकर गांव से विदा ली, पर जैसे ही जीप गांव के बाहर निकली-एसपी साहब ने जीप रुकवा दी। इसके बाद-दे दना दे दना रामभरोसे की पिटाई कर दी। बोले-कौन बड़ा? मैं या तू?

रामभरोसे ने मासूमियत से जवाब दिया- आप एसपी हैं तो आपको एसपी बताया। आपके बारे में कोई झूठ बोला ? और मैं अपने बारे में किसी से कुछ भी कहूं- डीआईजी या आईजी, आपको क्या?

रामभरोसे का जवाब सुनकर एसपी साहब भी समझ गए कि हो न हो-ये होनहार बिरवान एक दिन डीआईजी बनेगा ही।

3 टिप्पणियाँ:

बेनाम ने कहा...

:)

RC

15 अप्रैल, 2007 2:25 पूर्वाह्न  
Udan Tashtari ने कहा...

गलत समझे....डी आई जी क्या होता है?? वो तो एक दिन गृह मंत्री बनेगा..पक्का!! होनहार बिरवान के....!! हमने पहचान लिया!! :)

15 अप्रैल, 2007 8:02 पूर्वाह्न  
Mired Mirage ने कहा...

:)हमारा वोट तो जब भी रामभरोसे माँगेगे तो हम रामभरोसे उन्हीं को देंगे ।
घुघूती बासूती

16 अप्रैल, 2007 1:33 पूर्वाह्न  

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