Remove Ad

मंगलवार, 24 अप्रैल, 2007

हास्य कविता : प्रॉमिस है खतरनाक गोली

Bollywood Starlet Jia Khan / Jiya Khan pic from Nishabdएक दिन बच्चे के प्यार में,
जो उसके सामने
हमने "प्रॉमिस" नाम की खट्टी गोली गटकी
थोड़ी देर में लगा पता कि वो तो गले में अटकी
दरअसल, प्रॉमिस है एक बड़ी ही खतरनाक गोली का नाम
पिल्स ज्यादा हो जाएं तो है मौत का सामान
सुना नहीं है आपने?
रामायण काल में राजा दशरथ खा बैठे थे ये गोली..... कैकेयी के आगे
न निगलते बनी, न उगलते, सो सीधे स्वर्ग साधे
बहरहाल, खा के गोली हमने बच्चे से उसके जन्मदिन पर वादा कर दिया
वो था कि प्रॉमिस की आड़ में सिर पर चढ़ गया
दूसरे शब्दों में बात कुछ यूं थी जैसे
घर आए मेहमानों से दिखाया हो आपने कुछ ज्यादा प्यार
और वो उसी मोहब्बत में मांग बैठे मोटी रकम उधार
हमने कहा बोलो क्या चाहिए?
फुटबॉल, बैटबॉल ,साइकिल या उसके पहिए
वो बोला,ये सब जेब में धरिए
मुझे तो आप बस फिल्म ले चलिए
हमनें कहा - हां क्यों नहीं, बोलो कौन सी फिल्म देखोगे भइए
वो बेखटक बोला-तो गौर से सुनिए
निशब्द....
अब अपना दिमाग चकराया. सिर भन्नाया
बेटा, वो बकवास फिल्म है, न उसमें अमिताभ बूढ़ा है, न कोई बढ़िया कहानी है
शहर के किस थिएटर में लगी है, ये बात भी अंजानी है
अब बेटे ने अपने फिल्मी ज्ञान का धुआँधार प्रदर्शन किया
पापा,बिग बी हैं फिल्म के हीरो
और हीरोइन है जिया खान
रही बात कहानी की तो,उसमें है एक ताजगी
अभी तक देखा होगा आपने हीरो हीरोइऩ के बीच प्यार का चक्कर
लेकिन इस फिल्म में तो अपनी बेटी के सहेली से ही हैं हीरो घनचक्कर
और पता थिएटर का...
आप कहें तो बताए देता हूं सिलसिलेवार
अब हमें औऱ गुस्सा आया
फिर भी बालक को समझाया
बेटा, इस फिल्म के सब्जेक्ट में सचाई नहीं है...
और फिल्म में कुछ सीन भी अच्छे नहीं हैं
अब, अचानक बालक समीक्षक की मुद्रा में आ गया
फिर ताव खा गया
बोला, सब्जेक्ट तो बहुत जोरदार है
फिल्म में प्यार ही प्यार है
रही बात सीन्स की तो
किस सीन की बात कर रहें हैं आप
उस नहाने वाले सीन की-जिसमें जिया पाइस से खुद पर पानी डालती है
या
उस सीन की, जिसमें बिग बी टंगड़ी मारकर जिया को गिरा देते हैं
चुप बे जिया के बच्चे
बकवास मत कर
ये सब बातें तुझे किसने बतायीं?
घटिया फिल्म की जानकारी कहां से हथियाई?
बोला, पापा परसो फी-की न्यूज वाले
एक विंडो में ये सीन्स और दूसरे में इंटरव्यू दिखा रहे थे
और बीच-बीच में
सेक्स, अश्लीलता और नैतिकता जैसे शब्द बडबड़ा रहे थे
मैं सब समझता हूं पापा
आप क्यों घबरा रहे हैं
एडल्ट फिल्म है न
इसलिए सर्दी में पसीना बहा रहे हैं
लेकिन, आप प्रॉमिस की बात भूल रहे हैं
और बतौर मेरी टीचर,अब आप थूक के चाट रहे हैं
इस ज्ञान प्रदर्शन के बाद
पहले हमें अपनी अज्ञानता पर शर्म आयी
फिर अपनी उड़ी हवा हवाई
अचानक हम बुदबुदाए,वाह रे मीडिया दुहाई हो दुहाई
पहले बच्चे एडल्ट फिल्में सिनेमाघरों में देखते थे,
इसलिए डरते भी थे
देख लेता था कोई परिचित तो जमकर पिटते भी थे
लेकिन अब तो बैडरुम तक हो रहा है नग्नता का फूहड़ व्यापार
यही बिकता भी है शायद, इऩसे ही मिलते हैं विज्ञापन औऱ बढती मांग जोरदार
ये पहले सोचा, फिर होके शर्मसार
हमने मन ही मन सोचा
अगर बच्चे को फिल्म दिखा भी दी जाए
तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा
जिन्दगी के दोराहे पर शायद,वो बना ले हमें हमराज
इससे हमारे बीच विश्वास ही बढ़ेगा
विश्वास ही बढ़ेगा।


- पीयूष

लेबल: , , ,

4 टिप्पणियाँ:

Blogger Manish ने कहा…

अच्छा लिखा है आपने !

25 अप्रैल, 2007 8:28 अपराह्न  
Blogger Mired Mirage ने कहा…

बहुत खूब !
घुघूती बासूती

25 अप्रैल, 2007 9:57 अपराह्न  
Blogger Anil ने कहा…

very good you have opened shown the truth of news channels who say that we show you the truth

31 जनवरी, 2008 3:11 अपराह्न  
Blogger mukesh ने कहा…

shaandaar..yahi shabd hai mere paas..

23 फ़रवरी, 2008 9:06 पूर्वाह्न  

एक टिप्पणी भेजें

इस संदेश के लिए लिंक:

एक लिंक बनाएँ

<< मुखपृष्ठ