व्यंग्य-लिज़ खेलें फुटबॉल
जनाब बौखलाए हुए हैं। तमतमाए हुए हैं। चचा ग़ालिब से सीख लेकर आंखों में
खून उतार लिया है। अमेरिका-ब्रिटेन है, इसलिए मुठ्ठियां भींच के खड़े
हैं, भारत होता तो दो-चार कनपटी पर भी जड़ देते। तेरी ऐसी की तैसी
साले........????
भाई साहब के साथ अपनी पूरी सहानुभूति है। बेटा सुंदरी की मुहब्बत में बाप
को दुत्कार दे तो लहू उबलना लाज़िमी है। लेकिन, दुल्हन लिज़ हर्ले जैसी
खूबसूरत हो तो लड़के की भी क्या गलती ? शादी में फोटो खींचने का ठेका एक
विदेशी कंपनी को दिया गया। कंपनी ने सुंदर सुंदर फोटो खींचकर बेचने के
लिए मोटी रकम अदा की। अब, वो गोरी चमड़ी वालों के बीच आलतू-फालतू इंडियन
क्यों देखना चाहेगी ? जनाब अरुण नायर ये बात समझते थे। उन्होंने अपने
मां-बाप और देशी रिश्तेदारों को अलग बैठा दिया। कहा-जाओ,खाओ,पीयो, पर
यहां बीच में मत आओ। लेकिन, भाई विनोद नायर ये बात नहीं समझे। उखड़ गए।
बेटे को गुस्से में संपत्ति से ही बेदखल कर डाला। अब, बताइए, ये कोई बात
है भला ?
उधऱ,मोहतरमा अलग रोना रो रही हैं। उऩका कहना है कि खूंसठ सनकी बुढ्ढे के
चक्कर में पूरा इंडियन रीति को फॉलो किया। लेकिन, विनोद ने मेरा दिल
तोड़ा है । मैंने अरुण से पहले ही कहा था कि घरवालों से दूर रहकर निपटा
लो पूरा प्रोग्राम।
मुझे तीन दृश्य अचानक दिखायी दे रहे हैं-
पहला सीन फ्लैश बैक वाला है-
लिज़ हर्ले और अरुण नायर की टीमें जोधपुर के उम्मेद पैलेस में क्रिकेट
खेल रही हैं। लिज़ हर्ले की टीम में गोरी चमड़ी वाले खिलाड़ी है। अरुण की
टीम में भी गोरी चमड़ी वाले विदेशी दोस्त ही हैं। देशी रिश्तेदार और
दोस्त ग्राउंड के बाहर तालियां बजाने के लिए बैठाए गए हैं।
दूसरा सीन फ्यूचर का है-
इस बार खेल फुटबॉल का है। पूरा मीडिया तालियां बजा रहा है। लिज हर्ले गोल
पर गोल दागे जा रही हैं। गोल कीपर गेंद लपक नहीं रहा। पर फुटबॉल कौन ?
अरुण नायर। जी हां,अरुण नायर फुटबॉल बने हुए हैं। जमीन-जायदाद पिता ने
छीन ली। कुछ बचा नहीं तो लिज हर्ले ने भी फुटबॉल बना डाला। "अबे,शादी
करने का शौक है-इसलिए तुझसे शादी की थी। दो बार पहले की थी-लगा कुछ
इंडियन-विंडियन हो जाए-इसलिए तुझसे की। चल, अब निकल ले। चौथा प्रस्ताव
वेट कर रहा है।"
तीसरा सीन भारतीय अखबारों-चैनलों का है-
लिज और अरुण की ख़बरें फिर सुर्खियों में हैं। पहले बेगानी शादी में
अब्दुल्ला दीवाना था, अब बेगाने तलाक में दीवाना हो लिया है।
-पीयूष मोहन पांडे
खून उतार लिया है। अमेरिका-ब्रिटेन है, इसलिए मुठ्ठियां भींच के खड़े
हैं, भारत होता तो दो-चार कनपटी पर भी जड़ देते। तेरी ऐसी की तैसी
साले........????
भाई साहब के साथ अपनी पूरी सहानुभूति है। बेटा सुंदरी की मुहब्बत में बाप
को दुत्कार दे तो लहू उबलना लाज़िमी है। लेकिन, दुल्हन लिज़ हर्ले जैसी
खूबसूरत हो तो लड़के की भी क्या गलती ? शादी में फोटो खींचने का ठेका एक
विदेशी कंपनी को दिया गया। कंपनी ने सुंदर सुंदर फोटो खींचकर बेचने के
लिए मोटी रकम अदा की। अब, वो गोरी चमड़ी वालों के बीच आलतू-फालतू इंडियन
क्यों देखना चाहेगी ? जनाब अरुण नायर ये बात समझते थे। उन्होंने अपने
मां-बाप और देशी रिश्तेदारों को अलग बैठा दिया। कहा-जाओ,खाओ,पीयो, पर
यहां बीच में मत आओ। लेकिन, भाई विनोद नायर ये बात नहीं समझे। उखड़ गए।
बेटे को गुस्से में संपत्ति से ही बेदखल कर डाला। अब, बताइए, ये कोई बात
है भला ?
उधऱ,मोहतरमा अलग रोना रो रही हैं। उऩका कहना है कि खूंसठ सनकी बुढ्ढे के
चक्कर में पूरा इंडियन रीति को फॉलो किया। लेकिन, विनोद ने मेरा दिल
तोड़ा है । मैंने अरुण से पहले ही कहा था कि घरवालों से दूर रहकर निपटा
लो पूरा प्रोग्राम।
मुझे तीन दृश्य अचानक दिखायी दे रहे हैं-
पहला सीन फ्लैश बैक वाला है-
लिज़ हर्ले और अरुण नायर की टीमें जोधपुर के उम्मेद पैलेस में क्रिकेट
खेल रही हैं। लिज़ हर्ले की टीम में गोरी चमड़ी वाले खिलाड़ी है। अरुण की
टीम में भी गोरी चमड़ी वाले विदेशी दोस्त ही हैं। देशी रिश्तेदार और
दोस्त ग्राउंड के बाहर तालियां बजाने के लिए बैठाए गए हैं।
दूसरा सीन फ्यूचर का है-
इस बार खेल फुटबॉल का है। पूरा मीडिया तालियां बजा रहा है। लिज हर्ले गोल
पर गोल दागे जा रही हैं। गोल कीपर गेंद लपक नहीं रहा। पर फुटबॉल कौन ?
अरुण नायर। जी हां,अरुण नायर फुटबॉल बने हुए हैं। जमीन-जायदाद पिता ने
छीन ली। कुछ बचा नहीं तो लिज हर्ले ने भी फुटबॉल बना डाला। "अबे,शादी
करने का शौक है-इसलिए तुझसे शादी की थी। दो बार पहले की थी-लगा कुछ
इंडियन-विंडियन हो जाए-इसलिए तुझसे की। चल, अब निकल ले। चौथा प्रस्ताव
वेट कर रहा है।"
तीसरा सीन भारतीय अखबारों-चैनलों का है-
लिज और अरुण की ख़बरें फिर सुर्खियों में हैं। पहले बेगानी शादी में
अब्दुल्ला दीवाना था, अब बेगाने तलाक में दीवाना हो लिया है।
-पीयूष मोहन पांडे
लेबल: Hindi, piyush pandey, satire, व्यंग्य, हिन्दी


2 टिप्पणियाँ:
:) सही है.
अच्छा व्यंग्य लिखा है ।
घुघूती बासूती
टिप्पणी प्रेषित करें
इस संदेश के लिए लिंक:
एक कड़ी बनाएँ
<< मुखपृष्ठ