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रविवार, 13 मई, 2007

अरुण अरोड़ा की व्यंग्य कविता : मुलायम की चिट्ठी माया के नाम

फ़रीदाबाद के कवि अरुण अरोड़ा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति पर चुटकी ली है। आप भी इसका मज़ा लीजिए मुलायम की इस चिट्ठी का, जो लिखी गयी है माया के नाम।

पीर मेरी प्यार बन जा
है भगे मेरे गधे कुछ
है भगे तेरे गधे कुछ
आजा मिलकर जीते चुनाव
साइकल रखले हाथी पर, तू गले का हार बनजा
पीर मेरी प्यार बनजा
सवर्णो को भी माफ़ किया जब
मै भी हूँ इतना बुरा कब
मै बनूंगा मुख्यमंत्री, तू मेरी सरकार बनजा
पीर मेरी प्यार बन जा
अमर सिंह से बात कर ले
शर्ते सारी साफ़ कर ले
अम्बानी की गारन्टी दूंगा
तू गरल से छार बन जा, पीर मेरी प्यार बन जा
देश की चिन्ता तुझे कब
देश की चिन्ता मुझे कब
लूटन में उत्तर प्रदेश को, तू मेरी मददगार बन जा
पीर मेरी प्यार बन जा
मै अमर का हूँ मुलायम
तू भी है काशी की माया
आधा ले लेना मुझसे
पिछले सालों जो कमाया
मिल बाट कर खालेंगे अब, तू मेरी हमराह बन जा
पीर मेरी प्यार बनजा
अम्बानी को बांट लेंगे
अमिताभ को साथ लेंगे
गुण्डे तेरे साथ भी हैं
गुण्डे मेरे पास भी हैं
जुर्म घटाने मे युपी के, तू भी जुम्मेदार बन जा
पीर मेरी प्यार बन जा

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6 टिप्पणियाँ:

बेनाम ने कहा...

वाह, वाह। हम दुआ करते हैं, कि मायावती इस बार खायावती न हो जायें।

13 मई, 2007 9:15 अपराह्न  
परमजीत बाली ने कहा...

कविता पढ कर हम भ्रमित हो रहे हैं कि कहीं कविता मे कही बात सच न हो जाए।

13 मई, 2007 10:39 अपराह्न  
अभिनव ने कहा...

बहुत सुंदर, परमजीत जी के मन का भ्रम हमें भी हुआ है।

13 मई, 2007 11:51 अपराह्न  
Udan Tashtari ने कहा...

आह्ह्ह~!!! कितना यथार्थ झलकता है कवि की इन पंक्तिंयों में. :)

14 मई, 2007 3:13 पूर्वाह्न  
Shrish ने कहा...

इस पोस्ट का लिंक मायावती को भेजा जाए। :)

14 मई, 2007 5:25 अपराह्न  
ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey ने कहा...

कविता बहुत बड़ा यथार्थ है. अरुण जी इतनी साफ-साफ कहेंगे तो सारे राजनेताओं की तस्वीर एक सी हो जायेगी. तब हम क्या, उनके फालोअर भी भ्रमित हो जायेंगे कि किसके चेले हैं वे - माया के, मुलायम के या दोनों के.

फिलहाल तो हम अरुण जी के चेले बन रहे हैं.

15 मई, 2007 3:30 अपराह्न  

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