Tuesday, November 29, 2005

प्रपंचतंत्र कथा नंबर दो

प्रपंचतंत्र कथा नंबर टू
फोटू मैनेजमेंट और दो नंबर होने की कथाएं
आलोक पुराणिक
एक समय की बात है, जैसी कि हर समय होती है। एक दफ्तर था। दफ्तर में दो अत्यधिक ही निपुण कर्मचारी काम करते थे-कामी और सुनामी।
कामी जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि काम पर अत्यधिक ध्यान देता था। कामी का फंडा था कि काम करना चाहिए, उन्नति अपने आप हो जाती है।
सुनामी, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, बहुत अधिक नाम वाला बंदा था। सुनामी भी काम पर ध्यान देता था, पर उसका फंडा यह था कि सिर्फ काम नहीं करना चाहिए, बल्कि काम करते हुए दिखना भी चाहिए। सुनामी के फोटू तमाम जगह दिखायी देते थे, कंपनी की घरेलू पत्रिका में उसकी तमाम कविताएं-कहानियां छपती थीं, उनके साथ उसका नाम छपता था। कहानी-कविताएं सुनामी कहीं से मार दिया करता था। इस बारे में उसका पक्का मानना था कि अब कहानी-कविता कोई नहीं पढ़ता है, सो किसी की भी मारकर छाप दो। कोई पकड़ ही नहीं सकता, क्योंकि कोई पढ़ता ही नहीं।
कंपनी के किसी शो-रुम का उद्घाटन होता था, तो चैयरमैन के साथ उसी का फोटू अखबारों में छपता था। कंपनी की घरेलू पत्रिका में टीम भावना पर कोई लेख छपता था, तो उस में उसी फोटू होता था। और तो और चेयरमैन की बिटिया की शादी की एलबम में सबसे ज्यादा फोटू(वर-वधू के बाद ) उसी के थे। सुनामी वैसे काम तो ठीक-ठाक एवरेज टाइप करता था, और ऐसा काम तो दफ्तर में कई और लोग भी करते थे। पर औरों के फोटू उस तरह से नहीं छपते थे।
एक समय की बात है-जापान से एक कंपनी के चेयरमैन आये कामी की कंपनी के साथ कालोबोरेशन करने के लिए। जापानी चैयरमैन को कंपनी की तमाम पत्रिकाएं, खबरें दिखायी गयीं। और तो और इंडियन कंपनी का चेयरमैन जापानी चेयरमैन को अपने घर ले गया और उसे अपनी बिटिया की शादी की अलबम दिखायी।
सब जगह सुनामी की फोटू देखकर जापानी चेयरमैन बहुत ही इंप्रेस हुआ और इंडियन कंपनी के चेयरमैन से बोल- ये वाला इंपलाई तो बहुत ही इनर्जेटिक है। आप अपनी कंपनी की तरफ से इसे भेजिये जापान में स्पेशल ट्रेनिंग के लिए। ट्रेनिंग में पांच करोड़ रुपये साल मिलने का जुगाड़मेंट था।
सुनामी जब जापान जाने के लिए बैग-बक्सा बांध रहा था, तो कामी उसके पास आकर बोला-हे मित्र कामी तो मैं भी कम न था। मेरा काम तुमसे किसी भी मामले में कम नहीं है। मैंने भी चेयरमैन की बिटिया की शादी में कम काम नहीं किया। फिर जापान यात्रा तुम्हारे ही हिस्से कैसे आयी।
इस पर सुनामी बोला-हे कामी, काम तो इस धरा पर सब ही करते हैं। गधा भी काम करता है और चींटी भी। पर देखो, इंसानों में सबसे ज्यादा कद्र किन जानवरों की होती है, वो ही जिनका चेहरा और बाडी फोटोजेनिक होती है। देखो बंदर किस तरह से मुंह बनाकर धांसू पोज देता है, सो उसकी बहुत वैल्यू होती है। चुपचाप काम करते हुए गधे में किसी की दिलचस्पी नहीं होती। सो हे मित्र किसी कंपनी में प्रोग्रेस के लिए फोटू मैनेजमेंट बहुत जरुरी है। और फोटू मैनेजमेंट के फंडे किसी भी किताब में नहीं पढ़ाये जाते, खुद के तजुरबों से ही इन्हे सीखना पड़ता है।
देख कामी, फोटू का बहुत महत्व है। अब देखकर उस वाले शो-रुम के उद्घाटन के समय चेयरमैन के साथ वाली फोटू, दफ्तर के रिसेप्शन पर टंगी हुई है। सब खुद ब खुद पूछते हैं-किसकी फोटू है। सो हे मित्र चतुर सुजान अपनी फोटू सब तरफ जमाने के लिए बहुत ही परिश्रम करते हैं। मैंने कंपनी के फोटोग्राफर को विशेष तौर पर सैट किया है। वह हर फंक्शन में मेरी फोटू जरुर खींचकर चेयरमैन के साथ लगा देता है। अब चेयरमैन की फोटू तो छपनी ही छपनी है, साथ में अपनी भी छपती है। और चेयरमैन की बिटिया की शादी में काम तो तूने भी किया था, पर तूने ऐसे काम किये, जिनकी फोटू नहीं छपती। तू हलवाई के साथ आलू कटवाने में बिजी रहा। आलू कटवाने के सीन की फोटू नहीं छपती। मैंने कंपनी के वीआईपी मेहमानों को रिसीव करने में ध्यान लगाया। वीआईपी की फोटू खिंचती ही खिंचती है। सो अपन भी लटक लिये फोटू में। समझे। चेयरमैन की बीबी जितनी बार भी बिटिया की शादी की अलबम किसी को दिखाती है, उतनी ही बार उसे मेरी याद आती है। समझे कामी, जो बार-बार दिखता है, वही बार-बार बिकता है। तुम दिखे नहीं, तो उतने ऊंचे भावों में बिके नहीं।
ओ के मित्र, सुनामी तुम देखो कि मैं अब तुम्हारे मार्ग पर चल कर दिखाऊंगा-ऐसा कह कर कामी ने सुनामी को विदा किया।
बदले में सुनामी सिर्फ मुस्कुरा कर रह गया।
नंबर टू के लिए उपयुक्त
समय आगे बढ़ा। दफ्तर के चीफ पद पर किसी की नियुक्ति करने की बात चली। तमाम लोगों ने एप्लाई किया। सब लोग सोच रहे थे कि इस पद के लिए कामी की चयन हो जायेगा। क्योंकि कामी के पास काम था, काम में उसका नाम था।
पर नहीं, एक अत्यधिक ही चालू प्रवृत्ति के नौजवान-प्रजेंटू को दफ्तर के चीफ पद दे दिया गया। प्रजेंटू की क्षमताएं काफी कुछ सुनामी से मिलती थीं। प्रजेंटू की क्षमता यह थी कि वह किसी भी आइटम को बहुत फूं-फां अंगरेजी में पावर-पाइंट कंप्यूटर प्रजेंटेशन में पेश कर देता था। उसे पता रहता था कि कौन सी टाई आजकल फैशन में है और कौन से जूते अब आउटडेटेड हो चुके हैं।
कामी को नंबर टू की पोस्ट दी गयी, कामी सारा काम करता, पर क्रेडिट प्रजेंटू ले लेता था।
कामी ने फिर ई-मेल से सुनामी से पूछा-मित्र इधर मैंने फोटू मैनेजमेंट के जरिये तमाम अखबारों में अपने फोटू छपवाने शुरु किये हैं। दफ्तर का पूरा काम करता हूं, फिर भी मुझे नंबर एक पोजीशन के लिए उपयुक्त नहीं समझा गया।
जवाब में सुनामी ने लिखा-मित्र मैंने तुम्हारी फोटू देखीं और पाया कि तुम बेवजह मुस्कुराते दिखने की कोशिश में बहुत बेवकूफ दिख रहे हो। तुम्हारे फोटू देखकर लगता है कि उस शो रुम के उद्घाटन में मौजूद माडल की कंपनी में तुम बिलकुल कमफर्टेबल महसूस नहीं कर रहे हो। देखो, बेवकूफियों को सच्ची में इन्जाय करना सीखना पड़ता है। तुम्हारे फोटू देखकर लगता है कि तुम मजबूरी में यह सब कर रहे हो, जबकि तुम्हे ये सच्चे दिल से करना चाहिए। पर अब कुछ नहीं हो सकता, तुम्हारा व्यक्तित्व खास तरीके से गढ़ा जा चुका है, इस तरह की चीजों की तैयारी बहुत शुरु से की जानी चाहिए। यानी बेवकूफियों को इन्जाय करने क्षमताओँ का विकास अगर बचपन में नहीं हुआ, तो बड़े होकर बहुत दिक्कत होती है। सो हे मित्र कामी तुम सिर्फ काम के बूते पर सिर्फ दो नंबर की पोजीशन के लिए ही उपयुक्त हो। सिर्फ काम करने वाले दो नंबरी ही हो सकते हैं। एक नंबर के लिए कुछ दूसरे गुणों की दरकार होती है।
उस शाम को सुनामी अपने छोटे बेटे से यह कहते हुए पाये गये-
1- गधा भी काम करता है और चींटी भी। पर देखो, इंसानों में सबसे ज्यादा कद्र किन जानवरों की होती है, वो ही जिनका चेहरा और बाडी फोटोजेनिक होती है।
2- बास की बेटी की शादी में हलवाई के साथ आलू नहीं कटवाने चाहिए, बल्कि वीआईपी मेहमानों को रिसीव करना चाहिए। वरना फोटू का हिसाब-किताब बिगड़ जाता है।
3- बेवकूफियों को इन्जाय करने की क्षमताओँ का विकास अगर बचपन में नहीं हुआ, तो बड़े होकर बहुत दिक्कत होती है।

1 Comments:

Kanishk | कनिष्क said...

बात बिल्कुल सोलह आने सव है। काम अच्छा होना चाहिये, बढिया तरीके से दिखाना चाहिये और साथ ही काम करनेवाला भी दिखना चाहिये, तभी कोई भी इंसान ऊपर चढ सकता है।

10:57 AM, December 04, 2005  

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