Wednesday, November 30, 2005

प्रपंचतंत्र कथा नंबर तीन

प्रपंचतंत्र कथा-3-व्यक्तित्व विकास सीरिज
चुगली मैनेजमेंट की कथाएं
आलोक पुराणिक
जैसा कि सब जानते हैं कि किसी भी दफ्तर में कंप्यूटर काम करते हैं और इंसान भी काम करते हैं। एक हजार कंप्यूटरों को एक साथ किसी कमरे में रख दो, कोई किसी की चुगली नहीं करेगा।
पर यही बात इंसानों के बारे में नहीं कही जा सकती।
सात आदमी भी एक कमरे में हों, तो सात दिन बाद सातों एक दूसरे के बारे में सात तरह की चुगलियां करेंगे।
इस तरह की बातों से धनबटोरनगर के दो नौजवान-अपडेटे और क्लासिकज्ञान बहुत अच्छी तरह से वाकिफ थे।
दोनों को ही पता था कि काम करना नौकरी बचाये रखने के लिए जरुरी होता है, पर प्रोग्रेस के लिए चुगली प्रबंधन चकाचक होना आवश्यक है।
जैसा कि हमेशा ज्ञानी बंदे करते आये हैं, वास्तव में काम की बातों को उन्होने कभी किताबों में नहीं लिखा। चुगली, झूठ बोलना, चंपूगिरी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर तब ही तो किताबें नहीं पायी जातीं। तो साहब कथा शुरु यों होती है कि अपडेटे और क्लासिकज्ञान दोनों ही अपनी-अपनी तरह से चुगलियां किया करते थे।
क्लासिकज्ञान अपने सीनियर मैनेजर से चुगलियां कुछ इस तरह की किया करता था-
सुना, आपके कंपटीटर गुप्ताजी आपके बारे में क्या कह रहे थे, वो चेयरमैन के सेक्रेट्री से कह रहे थे कि आप दारु पीते हैं और दारु पीकर गाली-गलौज भी करते हैं। आपकी इमेज चौपट कर रहा है।
क्लासिकज्ञान की बात सुनकर सीनियर मैनेजर हूं-हां करते, फिर क्लासिकज्ञान नये सिरे से, चुगली के नये गुंताड़े भिड़ाने में जुट जाता। फिर क्लासिकज्ञान अगली बार आकर बताता-
सुना, आपके कंपटीटर गुप्ताजी आपके बारे में यह कह रहे थे कि आप दफ्तर से कागज-पेंसिल घर ले जाते हैं।
सुना, आपके कंपटीटर गुप्ताजी आपके बारे में ये अफवाह फैला रहे हैं कि आप दफ्तर में आयी नयी कन्या रीटा में बहुत इंटरेस्ट ले रहे हैं, उसका बहुत ध्यान रख रहे हैं। ऊपर तक इसकी चर्चा है।
क्लासिकज्ञान की ऐसी बातें सुनकर सीनियर मैनेजर हूं-हां करते।
क्लासिकज्ञान ने देखा कि वह चुगलीबाजी में मेहनत तो बहुत करता है, पर इसके रिजल्ट वैसे नहीं आते।
उधर अपडेटे का चुगली का अंदाज कुछ इस तरह का था-
पता है आपको दफ्तर में जो नयी लड़की आयी है-रीटा। यह कौन है।
बास पूछते-कौन है।
यह चैयरमैन के साढ़ू की साली है। पर इस बारे में वह नहीं चाहते कि किसी को कुछ बताया जाये।
अच्छा-बास की आंखे चौड़ी हो जातीं।
बास फिर रीटा का अच्छी तरह से ख्याल रखने लगते।
ख्याल रखने का मतलब, उसे बताते कि उसकी एफीशियेंसी का लेवल बहुत तेजी से बढ़ रहा है। आज उसने अपनी रिपोर्ट में सिर्फ पचास गलतियां की हैं, जबकि कल ये पचहत्तर थीं।
अपडेटे कुछ इस अंदाज में चुगली करता-
चेयरमैन का साला विदेश से इस शहर में घूमने आया है। दफ्तर में किसी को पता नहीं है।
अपडेटे की इस खबर पर फौरन बास कार्रवाई करते और चेयरमैन के साले की सेवा में जुट जाते।
अपडेटे किसी दिन बास के पास आकर कहता-सर पता है मैंने ऊपर चेयरमैन के सेक्रेट्री से क्या कहा है।
क्या –बास पूछते।
यही कि आपको देश-विदेश की पचास कंपनियों से नौकरियों के आफर है। बिल गेट्स ने खुद आपको मिलने के लिए न्यूयार्क बुलाया है-अपडेटे बताता।
कुछ दिन बाद यह हुआ यह कि अपडेटे और क्लासिकज्ञान के बास को एक धांसू प्रमोशन देकर कंपनी की न्यूयार्क ब्रांच का चीफ बना दिया गया और उससे कहा गया कि वह अपडेटे या क्लासिकज्ञान किसी एक को अपने साथ आफीसर आन स्पेशल ड्यूटीज बनाकर ले जा सकता है।
बास ने अपडेटे को अपने साथ ले जाने का फैसला किया।
एक दिन मौका देखकर क्लासिकज्ञान ने बास से कहा-सर चुगलियां तो मैं भी करता था। मैं भी आपको तरह-तरह की सूचनाएं देता था, पर आपने मेरे काम की वैल्यू नहीं की। अपडेटे को ही वजन दिया।
इस पर बास ने कहा-देखो, चुगली दो तरह की होती है-एक निगेटिव चुगली और दूसरी पाजिटिव चुगली। निगेटिव चुगली बोले, तो तुम मुझे यही बताते रहे कि कौन क्या मेरे बारे में क्या निगेटिव बोल रहा है। अरे, इंसान है, तो निगेटिव बोलेगा। देखो, हर इंसान आम तौर पर दूसरे के बारे में या तो निगेटिव बोलता है, या निगेटिव बोलने की इच्छा रखता है। पीठ पीछे बोले गये निगेटिव की चिंता नहीं करनी चाहिए। चिंता तब करनी चाहिए, जब आपके पीछे कोई पाजिटिव बोलने लगे। फौरन सतर्क हो जाना चाहिए कि अगला कुछ काम लेकर आयेगा। आजकल लोग किसी के बारे में पाजिटिव दो ही मौकों पर बोलते हैं-एक या तो किसी की श्रद्धांजलि के मौके पर या फिर तब, जब उससे कोई काम निकलवाना हो। सो हे मित्र तुम जो मुझे बताते थे, वो नार्मल बातें थीं, उससे मुझे कुछ फायदा नहीं हुआ। तुमने निगेटिव चुगली की।
पाजिटिव चुगली क्या होती है-क्लासिक ज्ञान से जिज्ञासा प्रस्तुत की।
इस पर बास ने आगे कहा- अपडेटे ने जमाने की लेटेस्ट चाल को समझा और उसने पाजीटिव चुगली पर ध्यान लगाया, यानी उसने ऐसी चुगलीबाजी की, जिससे मुझे फायदा हुआ। उसने ही मुझे बताया कि रीटा चेयरमैन के साढ़ू की साली है। मैंने उसकी सैटिंग की, तो ऊपर मेरी रिपोर्ट सही पहुंची। अपडेटे ने ही हेडक्वार्टर में जाकर अफवाह फैलायी कि मुझे बिल गेट्स ने बुलाया है मीटिंग के लिए। इसके बाद मेरी वैल्यू ऊपर बढ़ गयी। देखो अब के जमाने में मामला रिजल्ट ओरियेंटेड है, यानी पाजिटिव चुगली के ही रिजल्ट मिलते हैं, निगेटिव चुगली के नहीं।
ऐसा सुनकर क्लासिकज्ञान बोला-मुझे आपकी बातों से निम्नलिखित शिक्षाएं मिली हैं-
1-अब कोई किसी के बारे में पाजिटिव दो ही मौकों पर बोलता है, एक जब या तो अगले की श्रद्धांजलि सभा में बोल रहा हो, दूसरे तब, जब अगले से कोई काम निकलवाना हो।
2-सिर्फ चुगली काफी नहीं है, ध्यान निगेटिव नहीं पाजिटिव चुगली पर लगाना चाहिए, बास को अगर आपकी चुगली से फायदा होगा, तब ही वह आपको फायदा करवायेगा।
3-दफ्तर में आने वाली हर नयी कन्या से बहुत ही सम्मान से पेश आयें, वह आपके चेयरमैन के साढ़ू की साली हो सकती है।

10 Comments:

Pratik said...

स्‍वागत है आपका हिन्‍दी ब्‍लॉग मण्‍डल में।

7:04 AM, December 03, 2005  
मिर्ची सेठ said...

आप के हिन्दी ब्लॉगजगत में कदम बढ़िया लगे। पहले तकनीकी वाले आए अब मीडिया वाले आ रहे हैं बस जनता आती ही होगी। स्वागतम्।

पंकज

9:10 AM, December 03, 2005  
Kanishk | कनिष्क said...

वाह वाह, मजा आ गया कहानी पढकर, शिक्षा भी मिली साथ में। ऐसा मजेदार काम अर्थात् शिक्षाप्रद लेखन जारी रखिऐ।

10:48 AM, December 04, 2005  
अनूप शुक्ला said...

आलोक जी,
स्वागत है आपका। 'नेकी कर अखबार में डाल ' के बाद अखबारों में लेख पढ़ता रहा। यहां देख कर अच्छा लगा। आशा है नियमित लेखन चलता रहेगा इधर।

7:15 PM, December 04, 2005  
अनूप शुक्ला said...

आलोक जी,
स्वागत है आपका। 'नेकी कर अखबार में डाल ' के बाद अखबारों में लेख पढ़ता रहा। यहां देख
कर अच्छा लगा। आशा है नियमित लेखन चलता रहेगा इधर।

7:16 PM, December 04, 2005  
Nitin Bagla said...

साढू की साली तो खुद चैयरमेन की भी साली हुई....शायद :)...या बीवी भी हो सकती है...

6:21 AM, December 06, 2005  
Laxmi N. Gupta said...

अच्छा लिखा है, आपने। बहुत मज़ा आया। लिखते रहिये।

5:46 PM, December 06, 2005  
Anonymous said...

waiting for new story.

12:57 AM, December 07, 2005  
आशीष said...

आलोकजी,

आपका चिठ्ठा जगत मे स्वागत है, आशा है आप नियमीत लिखते रहेंगे.

आशीष

10:17 PM, December 07, 2005  
Raviratlami said...

कादम्बिनी में पुरस्कार पुराण पढ़ा. मजा आया.

उस पर कुछ यहाँ लिखा है-
मुझे अब तक इनाम क्यों नहीं मिला?

9:26 PM, December 22, 2005  

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